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Wednesday, March 11, 2026
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AIIMS Bhopal

Madhya Pradesh

भोपाल: AIIMS ने 200 कर्मचारियों को नौकरी से निकाला, सभी कर्मचारी पूर्व सैनिक

भोपाल  अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान भोपाल ने 200 पूर्व सैनिकों को नौकरी से निकाल दिया है। ये सभी सुरक्षा कर्मियों के तौर पर काम कर रहे थे। एम्स प्रबंधन का कहना है कि इनका कॉन्ट्रैक्ट खत्म हो गया था। इसलिए नई एजेंसी को काम दिया गया है। इससे सैकड़ों परिवारों पर बेरोजगारी का संकट आ गया है। नाराज पूर्व सैनिकों ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को पत्र लिखकर अपनी बहाली की मांग की है। भोपाल के एम्स में बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक सुरक्षा का काम देख रहे थे। इनकी संख्या

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एम्स भोपाल में कोरियोनिक विलस सैंपलिंग का सफल टेस्ट, गर्भ में ही पता चल जाएगी अनुवांशिक बीमारी

भोपाल एम्स भोपाल के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग ने कोरियोनिक विलस सैंपलिंग (सीवीएस) प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी की है। यह प्रक्रिया भ्रूण में किसी भी आनुवांशिक विकार की पहचान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। कोरियोनिक विलस सैंपलिंग (सीवीएस) एक प्रीनेटल टेस्ट है, जिसमें गर्भवती महिला के प्लेसेंटा से एक छोटा नमूना लिया जाता है। इस नमूने की जांच करके भ्रूण में किसी भी तरह की आनुवांशिक समस्या का पता लगाया जा सकता है। आनुवांशिक बीमारियों की हिस्ट्री चिकित्सकों का कहना है कि प्रसवपूर्व यह परीक्षण उन गर्भवती महिलाओं के लिए

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एम्स दिल्ली के बाद दूसरा अस्पताल बना एम्स भोपाल बच्चों में ब्लड कैंसर का होगा इलाज

 भोपाल  एम्स भोपाल ने बच्चों में रक्त कैंसर के इलाज में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। संस्थान ने हाल ही में एक सात वर्षीय बच्ची का सफल हापलो-आइडेंटिकल बोन मैरो ट्रांसप्लांट किया है, जो रिलेप्स्ड एक्यूट लिम्फोब्लास्टिक ल्यूकेमिया (बाल्य रक्त कैंसर) से पीड़ित थी। पहले एम्स दिल्ली में ऐसा प्रत्यारोपण किया जा चुका है एम्स भोपाल यह सफल ऑपरेशन करने वाला दूसरा अस्पताल बन गया है। इसके पहले एम्स दिल्ली में ऐसा प्रत्यारोपण किया जा चुका है। यह जटिल प्रक्रिया एम्स भोपाल के चिकित्सा ऑन्कोलॉजी और हीमेटोलॉजी विभाग के डॉ.

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एम्स भोपाल में खून की नसों पर टांके लगाने की नई तकनीक विकसित की, जुड़ सकेंगे नसे

भोपाल अगर किसी मरीज का पैर जल जाता है, उसकी हड्डी तक की मांस काली पड़ जाती है। उस हड्डी को ढकने के लिए शरीर के किसी अन्य हिस्से से मांस लगाया जाता है। मांस जीवित रहे इसलिए खून की नस को भी काटा जाता है। और पैर ही हड्डी पर लगाया जाता है। इस प्रक्रिया में कई बार अलग-अलग आकार की खून नसें होती है, जो जुड़ने में परेशानी पैदा करती हैं। क्योंकि वह नसें छोटी-बड़ी होती हैं, जो जुड़ने में परेशानी पैदा करती हैं, ऐसे स्थिति से निपटने

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भोपाल एम्स के डॉक्टर की तकनीक को मिला कॉपीराइट, सर्जरी दांतों और जबड़े का आकार ठीक करने में सहायक

भोपाल  एम्स भोपाल के में दंत चिकित्सा विभाग के एडिशनल प्रोफेसर डॉ अंशुल राय द्वारा विकसित 'सेजाइटल स्प्लिट आस्टियोटॉमी' तकनीक के लिए केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के औद्योगिक नीति और संवर्द्धन विभाग द्वारा कॉपीराइट दिया है। 'सेजाइटल स्प्लिट आस्टियोटॉमी' एक प्रकार की जबड़े की सर्जरी है, जिसमें निचले जबड़े को ऊपरी जबड़े से अलग किया जाता है। फिर उसे आगे या पीछे ले जाकर फिर से जोड़ा जाता है। यह सर्जरी दांतों और जबड़े का आकार ठीक करने में सहायक होती है। डॉ. राय ने बताया कि विकृत चेहरे

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