Saturday, January 24, 2026
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Madhya Pradesh

एयरबेस महाराजपुरा एयरफोर्स स्टेशन पर प्रधानमंत्री मोदी को घंटाभर इंतजार करना पड़ा

ग्वालियर

 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश के दूसरे सबसे बड़े एयरबेस महाराजपुरा एयरफोर्स स्टेशन पर शुक्रवार को करीब एक घंटे तक इंतजार करना पड़ गया। दिल्ली में खराब मौसम होने के कारण पीएम मोदी के विमान को क्लियरेंस नहीं मिल सका था, इस वजह से पीएम मोदी काफी देर तक प्लेन में बैठे रहें।

अलर्ट पर रही पुलिस व सुरक्षा एजेंसिया

पीएम मोदी अशोकनगर में एक कार्यक्रम में शामिल होने आए थे और इस दौरान ग्वालियर में उनकी ट्रांजिट विजिट थी। दोपहर दो बजे के करीब उनका विशेष विमान महाराजपुरा एयरफोर्स स्टेशन पर उतरा था।

अशोकनगर में कार्यक्रम खत्म होने के बाद पीएम मोदी शाम करीब साढ़े छह बजे दिल्ली के लिए रवाना होने वाले थे। लेकिन खराब मौसम की वजह से लगभग एक घंटे के बाद क्लियरेंस मिल सका, जिसके बाद शाम साढ़े सात बजे उनके विमान ने दिल्ली के लिए उड़ान भरी।

जितनी देर तक पीएम मोदी महाराजपुरा एयरबेस स्टेशन पर मौजूद रहे, इस दौरान पुलिस प्रशासन और सुरक्षा एजेंसिया हाई अलर्ट पर रहीं। अधिकारियों ने बताया कि पीएम मोदी करीब एक घंटे तक विमान के अंदर ही बैठे रहे।

प्रभारी मंत्री सहित नेताओं ने की पीएम मोदी की अगवानी

प्रधानमंत्री की अगवानी जिले के प्रभारी एवं जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, उद्यनिकी मंत्री नारायण सिंह कुशवाह, ऊर्जा मंत्री प्रद्युमन सिंह तोमर, सांसद भारत सिंह कुशवाह, विधायक मोहन सिंह राठौर व महापौर डॉ. शोभा सिकरवार, जिपं अध्यक्ष दुर्गेश कुंवर सिंह जाटव, मुख्य सचिव अनुराग जैन, डीजीपी कैलाश मकवाना, कलेक्टर रुचिका चौहान व पुलिस अधीक्षक धर्मवीर सिंह ने की।

क्यों खास है ग्वालियर एयरबेस?

पीएम मोदी ने जिस एयरबेस पर क्लियरेंस के लिए एक घंटे तक इंतजार किया, वह महाराजपुरा एयरबेस देश में सामरिक दृष्टि से एक खास महत्व रखता है। भारत द्वारा की गई सर्जिकल स्ट्राइक के दौरान ग्वालियर एयरबेस से भी लड़ाकू विमानों ने भाग लिया था। वहीं एयर टू एयर वायुसेना के विमानों में रि-फ्यूलिंग का इतिहास भी ग्वालियर एयरबेस के आसमान में रचा गया था।

इंडियन एयरफोर्स के मिराज एयरक्राफ्ट का ग्वालियर स्थित महाराजपुरा एयरबेस सबसे बड़ा स्टेशन है। पहले भी मिराज कारगिल युद्ध में इतिहास लिख चुका है। कारगिल युद्ध के समय मिराज ने ग्वालियर से उड़ान भरकर तीस हजार फीट की ऊंचाई से दुश्मनों पर हमला किया था।

 

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