Saturday, January 24, 2026
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प्रज्ञान और विक्रम के पास बस एक दिन और… चांद पर कल फिर हो जाएगी रात, क्या अपडेट…

इंपेक्ट डेस्क.

सितंबर के शुरुआत से गहरी नींद में गए प्रज्ञान रोवर और विक्रम लैंडर की चंद्र यात्रा समाप्त होती नजर आ रही है। दरअसल, चंद्रयान-3 लैंडिंग के बाद चांद पर दूसरी बार रात का सामना करने वाला है। वहीं, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी ISRO की चंद्रयान 3 के इन दो हिस्सों को जगाने की तमाम कोशिशें अब तक नाकाम रही हैं।


2 अक्टूबर को प्रज्ञान और विक्रम स्लीप मोड में चले गए थे। दरअसल, धरती के 14 दिनों के बराबर चांद पर एक दिन होता है। अब चांद की सतह पर सूर्य की रोशनी पड़ने के बाद से ही ISRO दोनों को दोबारा तैयार करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन अब तक सफलता नहीं मिल सकी है। हालांकि, स्पेस एजेंसी ने पहले ही साफ कर दिया है कि अगर लैंडर और रोवर दोबारा काम नहीं करते हैं, तो भी मिशन सफल माना जाएगा।

अब कम है उम्मीद!
चंद्रयान-3 जिस जगह पर लैंडिंग की थी, उसे भारत ने ‘शिव शक्ति पॉइंट’ नाम दिया था। खबर है कि इस पॉइंट पर 30 सितंबर को रात दोबारा शुरू हो सकती है। ऐसे में पहली ही रात के बाद नहीं जागे प्रज्ञान और विक्रम के सामने दूसरी रात का सामना करना बड़ी चुनौती होगी। राहत की बात है कि 23 अगस्त को लैंडिंग के बाद चंद्रयान पहले ही धरती पर काफी अहम डेटा भेज चुका है।

कोशिश कर रहा है, लेकिन अब तक सफलता नहीं मिल सकी है। हालांकि, स्पेस एजेंसी ने पहले ही साफ कर दिया है कि अगर लैंडर और रोवर दोबारा काम नहीं करते हैं, तो भी मिशन सफल माना जाएगा।

अब कम है उम्मीद!
चंद्रयान-3 जिस जगह पर लैंडिंग की थी, उसे भारत ने ‘शिव शक्ति पॉइंट’ नाम दिया था। खबर है कि इस पॉइंट पर 30 सितंबर को रात दोबारा शुरू हो सकती है। ऐसे में पहली ही रात के बाद नहीं जागे प्रज्ञान और विक्रम के सामने दूसरी रात का सामना करना बड़ी चुनौती होगी। राहत की बात है कि 23 अगस्त को लैंडिंग के बाद चंद्रयान पहले ही धरती पर काफी अहम डेटा भेज चुका है।

चुनौतियां क्यों
चांद पर रात के दौरान काफी तेज ठंड और घनघोर अंधेरा हो जाता है। माना जाता है कि चांद पर रात में पारा -180 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। अब विक्रम और प्रज्ञान को काम करने के लिए सौर ऊर्जा की जरूरत होती है। खास बात है कि विक्रम और प्रज्ञान को धरती पर लौटने के लिए तैयार नहीं किया गया है। ISRO ने कहा था कि अगर रात के बाद दोनों दोबारा काम करने लगते हैं, तो यह बोनस होगा।

ISRO ने जताई थी उम्मीद
ISRO का मानना था कि विक्रम और प्रज्ञान चांद की रात का सामना कर सकते हैं। एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, स्पेस एजेंसी के एक अधिकारी ने कहा था, ‘अगर यह चांद पर एक रात गुजारने में सफल हो जाता है, तो यह आगे की कई रातों का सामना कर सकता है।’

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