
रायपुर में पुलिस कमिश्नरी व्यवस्था लागू: अपराध नियंत्रण में नई उम्मीद
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इम्पेक्ट न्यूज। रायपुर।
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में 23 जनवरी 2026 से पुलिस कमिश्नरी (कमिश्नरेट) प्रणाली औपचारिक रूप से लागू हो गई है। यह व्यवस्था राज्य में पहली बार शुरू की गई है, जिसके तहत रायपुर जिले को दो हिस्सों में बांटा गया है – रायपुर नगरीय (21 थाने, पुलिस कमिश्नर के अधीन) और रायपुर ग्रामीण (12 थाने, एसपी के अधीन)।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सरकार का यह बड़ा कदम बढ़ती शहरी आबादी (लगभग 19 लाख) और अपराधों के बदलते स्वरूप को ध्यान में रखकर उठाया गया है।इस व्यवस्था के तहत 2004 बैच के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी डॉ. संजीव शुक्ला को रायपुर का पहला पुलिस कमिश्नर नियुक्त किया गया है।
डॉ. शुक्ला ने जीई रोड स्थित नए पुलिस कमिश्नर कार्यालय में पदभार ग्रहण कर लिया है। वे पूर्व में बिलासपुर रेंज के आईजी थे और दो बार राष्ट्रपति पुलिस पदक प्राप्त कर चुके हैं। कमिश्नर को मजिस्ट्रेटीय शक्तियां मिलने से कानून-व्यवस्था, ट्रैफिक प्रबंधन, भीड़ नियंत्रण और अपराध जांच में त्वरित निर्णय संभव होंगे।
- प्रमुख नियुक्तियां और तबादले
श्वेता श्रीवास्तव सिन्हा को रायपुर ग्रामीण एसपी बनाया गया।
अमित तुकाराम कांबले (2009 बैच) को अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (रायपुर नगरीय) की जिम्मेदारी सौंपी गई।
डॉ. लाल उमेद सिंह को जशपुर एसएसपी भेजा गया।
अन्य प्रमुख: रामगोपाल गर्ग (आईजी, बिलासपुर रेंज), अभिषेक शांडिल्य (आईजी, दुर्ग रेंज), बालाजी राव सोमावर (आईजी, राजनांदगांव रेंज) आदि।
कुल 15 आईपीएस अधिकारियों के साथ 42 से अधिक पुलिस अधिकारियों के तबादले हुए हैं।
2025 के अपराध आंकड़े: चुनौतियां और प्रगति रायपुर पुलिस ने जनवरी 2026 में 2025 का सालाना अपराध रिपोर्ट कार्ड पेश किया। कुल एफआईआर में कमी दर्ज हुई, लेकिन कुछ गंभीर अपराधों में वृद्धि चिंता का विषय बनी हुई है।
- कुल एफआईआर — 2025: 15,885-15,896 (2024: 17,703) → 10-11% कमी।
हत्या — 90-92 मामले (वृद्धि)।
हत्या के प्रयास — 97 मामले।
बलात्कार — 280 मामले (वृद्धि)।
चोरी — 1,442 मामले (4% कमी)।
लूट — 71 मामले (2.74% कमी)।
डकैती — 7 मामले।
धोखाधड़ी/ठगी — 292 मामले (वृद्धि)।
साइबर अपराध — वृद्धि दर्ज।
नशा तस्करी — 445 तस्कर गिरफ्तार, 2.81 करोड़ रुपये की ड्रग्स जब्त।
पुलिस ने दावा किया कि हत्या के 85 मामलों में 167 आरोपियों की गिरफ्तारी हुई और 80% मामलों में चार्जशीट दाखिल की गई। हालांकि, विपक्ष ने अपराधों में वृद्धि का आरोप लगाते हुए आंकड़ों पर सवाल उठाए हैं।
कमिश्नरी से अपराध नियंत्रण में क्या बदलाव?
कमिश्नरी प्रणाली भोपाल, इंदौर, मुंबई जैसे शहरों के मॉडल पर आधारित है। विशेषीकृत डिवीजन (DCP क्राइम एवं साइबर, DCP ट्रैफिक, जोनल DCP) से साइबर ठगी, ट्रैफिक उल्लंघन और महिलाओं के खिलाफ अपराधों पर फोकस बढ़ेगा। तेज निर्णय लेने से जांच और कार्रवाई में देरी कम होगी।
चुनौतियां बरकरार
थानों में मानव संसाधन की कमी (प्रति थाना औसत 30-35 जवान बनाम आवश्यक 75+)।
संसाधनों की कमी और सीमांकन विवाद (उरला, मुजगहन आदि क्षेत्र)।
गंभीर अपराधों (हत्या, रेप, साइबर) में वृद्धि से विशेष अभियान की जरूरत।
पुलिस कमिश्नरी व्यवस्था रायपुर की शहरी सुरक्षा को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। अनुभवी नेतृत्व और विशेषीकृत ढांचे से अपराध नियंत्रण में सुधार की उम्मीद है, लेकिन संसाधन वृद्धि और प्रभावी क्रियान्वयन से ही पूर्ण सफलता मिलेगी।
