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इम्पेक्ट न्यूज डेस्क।
भारत ने ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामनेई की मौत पर संवेदना व्यक्त की है। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने आज दिल्ली में ईरान के राजदूत से मुलाकात की और खामनेई की मौत पर कंडोलेंस रजिस्टर पर साइन किए। खामनेई की मौत रविवार को तेहरान में अमेरिका-इजरायल एयर स्ट्राइक में हुई थी।

भारत का यह कदम उसके रुख में छोटे से बदलाव का संकेत है, जिसमें उन एयरस्ट्राइक की निंदा नहीं की थी जिनमें खामनेई की मौत हुई थी और विपक्ष की फॉर्मल बयान की जोरदार मांगों के सामने सोची समझी चुप्पी बनाए रखी थी।
पीएम मोदी ने मिडिल ईस्ट के हालात पर जताई चिंता
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मिडिल ईस्ट के हालात पर अपनी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि भारत में हमेशा ऐसे झगड़ों का हल निकालने के लिए बातचीत और डिप्लोमेसी की अपील की है।
विपक्ष लंबे समय से कर रहा था मांग
भारत का रिएक्शन जी7 डेमोक्रेसी जैसा ही था, जिनमें से किसी ने भी शोक संदेश जारी नहीं किया था। विपक्ष ईरान के साथ भारत के लंबे समय से चले आ रहे रिश्तों की ओर इशारा करते हुए इसकी मांग कर रहा है।
एक समय था जब भारत अपनी जरूरत का 13 परसेंट तेल ईरान से खरीदता था और उससे काफी व्यापार करता था, लेकिन न्यूक्लियर डील से ईरान के हटने के बाद उस पर US के बैन लगने से यह व्यापार तेजी से कम हो गया।
अमेरिका ने बुधवार को भारत से लौट रहे ईरानी युद्धपोत IRIS देना को श्रीलंका के पास हमला कर डुबा दिया था। श्रीलंका की नौसेना के अनुसार अब तक 87 शव बरामद किए गए हैं, जबकि 32 लोगों को बचा लिया गया है। रॉयटर्स के मुताबिक करीब 60 लोग अभी भी लापता हैं और उनकी तलाश जारी है।
यह ईरानी जहाज 18 फरवरी को भारत के विशाखापट्टनम में आयोजित 2026 इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू (IFR) और MILAN-2026 मल्टीलेटरल नेवल एक्सरसाइज में हिस्सा लेने आया था। 25 फरवरी को यह भारत से रवाना हुआ था।
जब इस पर हमला हुआ तब यह जहाज दक्षिणी श्रीलंका के गाले शहर से करीब 40 समुद्री मील (करीब 75 किलोमीटर) दूर था। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पहली बार है जब अमेरिकी नौसेना की पनडुब्बी से दागे गए टॉरपीडो ने किसी जहाज को युद्ध में निशाना बनाया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका अब तक ईरान के 20 वॉरशिप को समुद्र में डुबो चुका है।
