Saturday, January 24, 2026
news update
National News

भारत बना दुनिया का नंबर-1 रेमिटेंस पाने वाला देश, प्रवासियों ने तोड़ा रिकॉर्ड

नई दिल्ली 
भारत के प्रवासी नागरिकों ने देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में एक नया रिकॉर्ड बना दिया है। वित्त वर्ष 2024-25 (जो 31 मार्च को समाप्त हुआ) में विदेशों में रह रहे भारतीयों ने अपने परिवारों को 135.46 अरब डॉलर (यानी करीब 11.63 लाख करोड़ रुपए) भेजे। यह अब तक किसी एक साल में भेजी गई सबसे बड़ी रेमिटेंस राशि  है।

रेमिटेंस में सालाना 14% की बढ़ोतरी
इस रकम में साल-दर-साल 14.24% की वृद्धि देखी गई। यह आंकड़ा 8 साल पहले यानी  2016-17 में भेजे गए 61 अरब डॉलर  की तुलना में  दोगुने से भी ज्यादा  है। इसका मतलब साफ है कि विदेशों में बसे भारतीयों की आमदनी और समृद्धि बढ़ी है और भारतीय वर्कफोर्स की अंतरराष्ट्रीय मांग भी मजबूत हुई है। 

अमेरिका, सिंगापुर, ब्रिटेन से आया 45% पैसा
 रिज़र्व बैंक (RBI)  की रिपोर्ट के अनुसार, कुल रेमिटेंस का 45% हिस्सा अमेरिका, ब्रिटेन और सिंगापुर से आया है। वहीं खाड़ी देशों से रेमिटेंस में गिरावट देखी गई है।  तेल की कीमतों में गिरावट  के कारण वहां से कम पैसा भेजा जा रहा है, जिसकी भरपाई पश्चिमी देशों से हो रही है। विश्व बैंक  के मुताबिक, भारत पिछले 10 वर्षों से सबसे अधिक रेमिटेंस प्राप्त करने वाला देश बना हुआ है। 2024 में भारत पहले स्थान पर रहा, जबकि मेक्सिको (5.8 लाख करोड़) और चीन (4.1 लाख करोड़ रुपए) दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे।

 व्यापार घाटे की भरपाई में मददगार
RBI की रिपोर्ट बताती है कि रेमिटेंस सिर्फ आमदनी का जरिया नहीं बल्कि भारत की अर्थव्यवस्था का  एक मजबूत स्तंभ  है।  यह विदेशी निवेश (FDI) से भी बड़ा स्रोत  बन गया है। वित्त वर्ष 2025 में भारत का 287 अरब डॉलर का व्यापार घाटा  रहा, जिसमें से 47% की भरपाई  रेमिटेंस से हुई। यह साफ करता है कि  प्रवासी भारतीयों का योगदान भारत की वित्तीय सेहत के लिए अत्यंत अहम  है। भारत के प्रवासी नागरिक सिर्फ विदेशी धरती पर काम नहीं कर रहे, वे भारत के आर्थिक भविष्य की नींव भी मजबूत कर रहे हैं। रेमिटेंस अब न केवल पारिवारिक मदद बल्कि राष्ट्रीय आर्थिक रणनीति का भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।

error: Content is protected !!