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डंकिनी नदी पर कैसे बना दी रिटेनिंग वाल, एनजीटी करायेगी जांच… एनजीटी ने किया कमेटी का गठन, जैव विविधता बोर्ड और पर्यावरण संरक्षण मंडल के अफसर शामिल

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जैव विविधता बोर्ड करवा चुका है मौके का सर्वे, तात्कालीन कलेक्टर नंदनवार ने दी थी स्वीकृति

अभिषेक भदौरिया। दंतेवाडा।

डंकिनी तट पर डंप किये गये टेलिंग्स के अलावा दूसरे छोर पर बनाये गये रिटेनिंग वाल को लेकर एनजीटी ने जांच आदेश दिया है। एनजीटी ने इस रिटेनिंग वाल के कार्यादेश की जांच के लिए कमेटी का गठन किया है। एनजीटी ने इसके लिये अलग अलग विभागों से एक एक प्रतिनिधि नियुक्त कर जांच कराने के आदेश शासन को दिये है। ये कमेटी अपनी रिपोर्ट नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल को सौंपेगी।

एनजीटी द्वारा जिस कमेटी की अनुशंसा की गयी है उसमें पर्यावरण मंडल और जैव विविधता बोर्ड से एक एक प्रतिनिधि के साथ डीएफओ या वन विभाग के एक अफसर सहित वर्तमान कलेक्टर को भी इस कमेटी में शामिल किया है। इस कमेटी द्वारा जांच की जायेगी कि कलेक्टर ने किन परिस्थितियों में रिटेनिंग वाल निर्माण का कार्य आदेश जारी किया था। और इस निर्माण का नदी के आसपास पनपने वाले वनस्पति व जलीय जीवों को कोई नुकसान तो नहीं हो रहा इसपर रिपोर्ट तैयार करने को कहा है। निष्पक्ष जांच की जाए तो पूर्व कलेक्टर समेत पर्यावरण संरक्षण मंडल की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

बायो डायवर्सिटी बोर्ड ने कराया सर्वे – हाल ही में बायो डायवर्सिटी ने कंजर्वेशन कोर सोसाइटी से इस जगह का सर्वे कराया गया था। सर्वे में कमेटी ने पाया कि यहां नदी तल पर ही पक्का निर्माण किया गया है। इस निर्माण से बडी संख्या में औषधि वनस्पति व जलीय जीव नष्ट हो गये हैं। साथ ही कई जीव जंतुओं का प्राक्रतिक आवास पूरी तरह नष्ट हो गया है। इन जीवों और वनस्पतियों का मानव जीवन पर सीधा असर पडता है।

इधर कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया कि मिट्टी हटाकर कांक्रीट से निर्माण किये जाने की वजह से पौधे व जीव दुबारा नहीं पनप सकते। बता दे कि नदी के तट पर बड़ी संख्या में औषधि वनस्पति पनपती हैं साथ करोड़ों छोटे जीव जंतुओं का यह प्राकृतिक आवास होता है। साथ ही नदी तट पर रहने, विचरण करने वाले जीव भी इस निर्माण की वजह से मारे गये हैं।

खुदाई से हुआ पर्यावरण को नुकसान– कंजर्वेशन कोर सोसाइटी के सर्वे में इसका खुलासा हुआ है कि इस वॉल के निर्माण से पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचा है। विशेषज्ञों की माने तो इसके निर्माण के दौरान बड़ी मात्रा में नदी के तट की गीली मिट्टी खोदकर निकाली गई थी। जिससे बड़ी मात्रा में मीथेन और कार्बन डायऑक्साइड गैस निकली होगी। जो कि क्लाइमेट चेंज में बड़ी भूमिका निभाता है।

नदी किनारे की मिट्टी में बड़ी संख्या में सूख जीव मौजूद रहते हैं जो भूमि की उर्वरकता बनाए रखने में बड़ी भूमिका निभाते हैं। यहां की मिट्टी निकालकर प्रशासन ने प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से पर्यावरण को बड़ी क्षति पहुंचाई है। साथ ही इस दीवार ने नदी के प्राकृतिक बहाव पर भी असर डाला है। क्योंकि इसका निर्माण रिवर बेड पर किया गया है। जबकि संस्था की माने तो इसे बाढ़ के उच्चतम स्तर से दूर बनाना था।

कलेक्टर ने दिया था कार्यादेश – इस रिटेनिंग वाल का कार्यादेश तात्कालीन कलेक्टर विनीत नंदनवार ने दिया था। इस कार्यादेश के बाद ही कृष्ण एंटरप्राइजेज ने डंकनी के तट पर कार्य प्रारंभ किया था। रिटेनिंग वाल निर्माण में नियमों की धज्जियां उडाई गयी और साथ ही बायो डायवर्सिटी को भी जमकर नुकसान पहुंचाया गया। एनजीटी द्वारा जिस कमेटी की अनुशंसा की गयी वो इसी दिशा में जांच करेगी। जांच में यह बिंदु भी शामिल है कि बायोडायवर्सिटी को कोई नुकसान न पहुंचा हो और नदी के बहाव में कोई छेडछाड तो नहीं की गयी है।