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माओवादियों का सबसे खूंखार लीडर हिड़मा मुठभेड़ में मारा गया… Source Telngana TV

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इम्पेक्ट न्यूज। जगदलपुर।

सुबह करीब 11 बजे तेलंगाना के टीवी चैनलों ने एक खबर को ब्रेक किया है। जिसके मुताबिक माओवादियों का सबसे खूंखार लीडर हिड़मा के मुठभेड़ में मारा गया है। बताया गया है कि उसके साथ उसकी पत्नी भी मारी गई है। हांलाकि इसकी अब तक आफिसियल पुष्टि नहीं हो पाई है। बस्तर के सभी मीडिया समूहों के वाट्सएप में यह खबर तेजी से चलाई जा रही है। तेलंगाना के पुलिस महानिदेशक ने इसकी पुष्टि कर दी है। फिलहाल डिटेल का इंतजार है।

माड़वी हिड़मा कौन है?

माड़वी हिड़मा (जिसे हिडमन्ना, हिडमालु, संतोष, इंदमुल या पोडियाम भीमा जैसे नामों से भी जाना जाता है) भारत के सबसे खूंखार माओवादी नक्सली कमांडरों में से एक है। व

ह छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में नक्सलवाद का पर्याय माना जाता है और सुरक्षा बलों के लिए एक बड़ा खतरा है। उसके सिर पर केंद्र सरकार ने 1 करोड़ रुपये का इनाम घोषित किया है। हिड़मा को नक्सली संगठन भाकपा (माओवादी) की केंद्रीय कमेटी का सदस्य और पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (PLGA) की बटालियन नंबर-1 का प्रमुख बताया जाता है।

वह दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZC) का भी हिस्सा है।पृष्ठभूमि और शुरुआतजन्म और मूल: हिड़मा का जन्म छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के पुरवती गांव में एक स्थानीय जनजाति (गोंड या माडवी) परिवार में हुआ था। उसकी उम्र वर्तमान में 50-55 वर्ष के आसपास बताई जाती है।

नक्सलवाद में प्रवेश: वह 1996-97 में मात्र 17 वर्ष की उम्र में माओवादी संगठन से जुड़ा। कुछ स्रोतों के अनुसार, वह 14 वर्ष की उम्र से ही बाल संघम (नक्सली संगठन का बाल संगठन) में सक्रिय था, जहां उसे विचारधारा का प्रशिक्षण मिला। धीरे-धीरे वह सैन्य प्लाटून, लोकल ऑर्गनाइजेशन स्क्वाड (LOS) और एरिया कमिटी मेंबर तक पहुंचा। 2001 से वह पूर्ण रूप से सक्रिय नक्सली बन गया।

प्रमुख गतिविधियां और अपराधहिड़मा को बस्तर क्षेत्र में नक्सली हमलों का मास्टरमाइंड माना जाता है। उसके नेतृत्व में PLGA बटालियन-1 ने कई बड़े हमले किए हैं, जिनमें सैकड़ों सुरक्षाबल के जवान शहीद हुए। कुछ प्रमुख घटनाएं:2010 का दंतेवाड़ा हमला: 76 CRPF जवानों की हत्या।
2013 का झीरम घाटी हमला: महाराष्ट्र के तत्कालीन गृहमंत्री के काफिले पर हमला, जिसमें 27 लोग मारे गए।
2017 का बुरकापाल हमला: सुकमा में 25 CRPF जवानों की मौत।
2021 का ताड़मेटला हमला: 22 सुरक्षाबलों की हत्या।

कुल मिलाकर, पिछले एक दशक में उसके अभियानों से सैकड़ों मौतें हुईं, जिसमें जवान, नागरिक और अन्य नक्सली शामिल हैं।

वह सुकमा को अपना गढ़ मानता है और हमेशा 3-5 लेयर की सुरक्षा में रहता है। संगठन में उसकी पहचान को गुप्त रखा जाता है, इसलिए आम कैडर को भी उससे मिलने की अनुमति नहीं होती।वर्तमान स्थिति (नवंबर 2025 तक) आज ही तेलंगाना में एक मुठभेड़ में इसके मारे जाने की सूचना आई है। फिलहाल इसकी पुष्टि आधिकारिक तौर पर नहीं की गई है। अबूझमाड़ (छत्तीसगढ़) के जंगलों में छिपा हुआ माना जाता है। हाल के वर्षों में सुरक्षा बलों ने बस्तर में बड़े ऑपरेशन चलाए हैं, जैसे 2025 में बसवा राजू (माओवादी महासचिव) का एनकाउंटर, लेकिन हिड़मा को पकड़ना अभी बाकी है।

जून 2025 में उसकी एक 10-25 वर्ष पुरानी नई तस्वीर सामने आई, जो खुफिया एजेंसियों के लिए पहचान आसान कर सकती है।
केंद्र सरकार ने 2026 तक नक्सलवाद समाप्त करने का लक्ष्य रखा है, और हिड़मा अब सुरक्षाबलों का प्रमुख निशाना है। हाल ही में, कुख्यात नक्सली सुजाता (किशनजी की पत्नी) ने आत्मसमर्पण किया, जो हिड़मा को ट्रेनिंग दे चुकी थीं, जिससे संगठन को झटका लगा।

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