
छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सुविधाओं का मुद्दा: आयुष्मान योजना और अस्पतालों की स्थिति पर चर्चा
इम्पेक्ट न्यूज़। रायपुर।
छत्तीसगढ़ विधानसभा में आयुष्मान भारत योजना (प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना या शहीद वीर नारायण सिंह योजना) पर हुई गहन चर्चा में कांग्रेस विधायक कविता प्राण लहरे द्वारा उठाई गई प्रमुख चुनौतियों—जैसे निजी अस्पतालों द्वारा कार्डधारियों का इलाज अस्वीकार करना (विशेषकर प्रसव, गंभीर बीमारियों और आवश्यक उपचारों में), क्लेम भुगतान में लंबी देरी (कुछ मामलों में 745 दिनों तक), ऑडिट प्रक्रिया, बैंक विवरण त्रुटियों तथा तकनीकी कारणों से उत्पन्न बाधाएं, दंत उपचार की अनुपस्थिति, और बड़े निजी अस्पतालों (जैसे अपोलो, बिलासपुर) को योजना में शामिल न करने से गरीब मरीजों की परेशानियां—पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। कविता प्राण लहरे ने बिलाईगढ़ विधानसभा क्षेत्र में गर्भवती महिलाओं और नवजातों की मौत के उदाहरण दिए, जबकि अमर अग्रवाल, अजय चंद्राकर तथा धर्मलाल कौशिक जैसे विधायकों ने अपोलो अस्पताल सहित अन्य बड़े संस्थानों पर नियंत्रण, लाइसेंस समीक्षा, फायर ऑडिट या मजबूत कार्रवाई की मांग की। उन्होंने प्रसव पैकेज को योजना में शामिल करने, 100% संस्थागत डिलीवरी हासिल करने, भुगतान प्रक्रिया तेज करने तथा बड़े अस्पतालों के सीईओ से बैठक कर दबाव बनाने का सुझाव दिया, साथ ही दंत रोगों से जुड़ी सामाजिक समस्याओं (जैसे शादी में बाधा) पर भी जोर दिया।
स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जयसवाल ने इन चिंताओं को जायज मानते हुए योजना की उपलब्धियों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में कुल 13,38,000 प्रकरणों में उपचार प्रदान किया गया, जिसमें निजी अस्पतालों को 4,91,000 प्रकरणों पर 1,485 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान हुआ; जनवरी तक भुगतान पूरा हो चुका था और वर्तमान में लगभग 500 करोड़ रुपये बकाया हैं, जिसे नियमित रूप से चुकाया जा रहा है। प्रसव पैकेज पर स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार ने इसे योजना से बाहर रखा है, लेकिन राज्य सरकार शासकीय अस्पतालों में 3,500 रुपये प्रति मामला प्रदान करती है, जिसके तहत 2025-26 में 1,66,776 प्रसव मामलों में 119 करोड़ रुपये का भुगतान हुआ (पिछले वर्ष 1,81,318 मामलों में 130 करोड़)। दंत उपचार के लिए सामान्य इलाज केंद्र योजना में शामिल नहीं है, लेकिन दुर्घटना तथा मुख-कैंसर संबंधी सर्जरी कवर की जाती हैं। मंत्री ने भुगतान देरी के कारणों को ऑडिट और तकनीकी मुद्दों से जोड़ा तथा आश्वासन दिया कि भुगतान की कमी से इलाज नहीं रुका है; संस्थागत डिलीवरी लगभग 99% तक पहुंच चुकी है और 100% लक्ष्य के लिए प्रयास जारी हैं।
चर्चा के समापन पर स्वास्थ्य मंत्री ने सकारात्मक और प्रगतिशील दृष्टिकोण अपनाते हुए रायपुर में श्री बालाजी हॉस्पिटल जैसे बड़े संस्थानों के खुलने का उल्लेख किया, जहां एड्स (एचआईवी) जैसे गंभीर रोगों का उपचार सुचारू रूप से चल रहा है तथा आयुष्मान कार्ड के तहत निःशुल्क ओपीडी, इलाज, ऑपरेशन, कैंसर, किडनी ट्रांसप्लांट, डायलिसिस, कार्डियक समस्याएं आदि की सुविधाएं उपलब्ध हैं। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम जी का आभार व्यक्त किया तथा विधायकों की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए विभाग को निर्देश दिए कि आयुष्मान योजना की संपूर्ण समीक्षा की जाए और एक सप्ताह के भीतर निर्णय लिया जाए कि और अधिक अस्पतालों (विशेषकर बड़े निजी संस्थानों) को योजना में कैसे शामिल किया जा सकता है। आवश्यकता पड़ने पर सरकार नए कानून लाने में भी संकोच नहीं करेगी। इस उद्देश्य से सदन को एक सप्ताह का समय प्रदान किया गया, जिसमें सत्य प्रतिलिपि तैयार की जाएगी तथा सदन पुनः बुलाए जाने पर लिए गए निर्णय सदन में प्रस्तुत किए जाएंगे। यह कदम योजना के विस्तार, भुगतान सुधार, निजी अस्पतालों की भागीदारी बढ़ाने तथा गरीबों को बेहतर स्वास्थ्य पहुंच सुनिश्चित करने की सरकार की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिससे विधानसभा में लोकहित के इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर रचनात्मक और आशावादी संवाद स्थापित हुआ।
