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चीन ने खरीदा, रूस ने बेचा 9 टन सोना; सेंट्रल बैंकों की गोल्ड खरीद 80% तक गिरी, अब भरभरा कर गिरेंगे दाम?

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  • जनवरी में केंद्रीय बैंकों की सोने की खरीद 80% तक गिरी
  • भू-राजनीतिक तनाव और डॉलर पर निर्भरता कम करने को खरीद
  • चीन ने लगातार 15वें महीने सोना खरीदा, रूस ने 9 टन बेचा

बिजनेस डेस्क। नई दिल्ली|

वैश्विक स्तर पर सोने की कीमतों को सहारा देने वाली केंद्रीय बैंकों की खरीद अचानक धीमी पड़ गई है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (world gold council) की नई रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी 2026 में केंद्रीय बैंकों की गोल्ड खरीद पिछले साल के मुकाबले करीब 80% गिर गई, जिससे बाजार में यह सवाल उठने लगा है कि क्या सोने की तेजी रुकने वाली है या यह सिर्फ अस्थायी ब्रेक है।

रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी में केंद्रीय बैंकों ने कुल सिर्फ 5 टन सोना खरीदा, जबकि पूरे 2025 में औसतन हर महीने 27 टन की खरीद हो रही थी। यानी खरीद की रफ्तार में तेज गिरावट देखने को मिली है।

WGC ने अपनी रिपोर्ट में क्या कहा?
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) की एशिया-पैसिफिक सीनियर रिसर्च लीड मारिसा सलीम के मुताबिक

साल की शुरुआत में सोने की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव और मौसमी कारणों की वजह से कई केंद्रीय बैंकों ने फिलहाल खरीद धीमी कर दी। साल की शुरुआत अक्सर कई केंद्रीय बैंकों के लिए शांत अवधि होती है, जिससे खरीद के आंकड़ों पर असर पड़ सकता है।”

जियो पॉलिटिकल टेंशन के कारण बढ़ी कीमत
हाल के महीनों में भू-राजनीतिक तनाव और ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता के कारण सोने की कीमतों में रिकॉर्ड स्तर तक तेजी आई है। ऐसे में कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव होने पर रिजर्व मैनेजर अक्सर खरीद को कुछ समय के लिए टाल देते हैं।

इसके बावजूद विश्लेषकों का मानना है कि

केंद्रीय बैंक सोने को रणनीतिक रिजर्व के रूप में छोड़ नहीं रहे हैं। 2022 के बाद से दुनिया भर के केंद्रीय बैंक लगातार अपने गोल्ड रिजर्व बढ़ा रहे हैं ताकि पारंपरिक रिजर्व मुद्राओं, खासकर अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम की जा सके।

चीन ने लगातार 15वें महीने खरीदा सोना!
जनवरी में खरीद कम जरूर रही, लेकिन कई देशों ने सोना जोड़ा। उज्बेकिस्तान सबसे बड़ा खरीदार रहा, जिसने 9 टन सोना खरीदा और उसका कुल गोल्ड रिजर्व बढ़कर 399 टन हो गया। इसके अलावा मलेशिया, चेक गणराज्य, इंडोनेशिया, चीन और सर्बिया ने भी सोना खरीदा। चीन ने लगातार 15वें महीने अपने रिजर्व में सोना जोड़ा है।

वहीं बिक्री की बात करें तो रूस के केंद्रीय बैंक ने जनवरी में 9 टन सोना बेचा, जबकि बुल्गारिया ने 2 टन सोना कम किया। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के बीच केंद्रीय बैंक आगे भी सोना खरीदते रह सकते हैं।

निवेशकों के लिए क्या संकेत?
विश्लेषकों के मुताबिक केंद्रीय बैंकों की खरीद में आई यह गिरावट फिलहाल अस्थायी हो सकती है। लंबी अवधि में अगर भू-राजनीतिक तनाव और डॉलर पर निर्भरता कम करने की रणनीति जारी रहती है, तो सोने की कीमतों को मजबूत सपोर्ट मिलता रहेगा। ऐसे में निवेशकों के लिए गिरावट के समय चरणबद्ध निवेश की रणनीति बेहतर मानी जा रही है।