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Wednesday, March 11, 2026
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दंतेवाड़ा के DMF भ्रष्टाचार को लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय में दर्ज करवाई दी गई शिकायत… मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ भी दे दी गई प्रतिलिपि…

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आदरणीय
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी
सादर अभिवादन

आपने प्रधानमंत्री पद का दायित्व संभालने के बाद सबसे बड़ा कदम वंचितों के विकास के लिए उठाया। जिसमें एक बड़ी पहल थी जिला खनिज न्यास का गठन और उसका क्रियान्वयन। महोदय आपके इस महान फैसले से दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा जिले को सबसे बड़ा आर्थिक स्त्रोत प्राप्त हुआ जिसके तहत वर्ष 2016 में जिला खनिज न्यास के गठन के बाद से 2023 तक हजारों करोड़ रुपए दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा जिले को हासिल हुए।

यह उपलब्धि ही है कि जिस इलाके में दशकों से राष्ट्रीय खनिज विकास निगम एनएमडीसी लौह अयस्क खनन का कार्य कर रही है। उसके द्वारा सीएसआर कार्पोरेट सोशल रिस्पांसबिलिटी के तहत मामूली सी रकम दी जाती रही। जिसके तहत प्रभावित जिला को स्वयं प्रयास करना होता था। दंतेवाड़ा जिले में डीएमएफ की व्यवस्था लागू होने के बाद गरीब, आदिवासी और पिछड़े लोगों के लिए बड़ी राशि मुहैया होने लगी।

पर महोदय आपके संज्ञान में लाना आवश्यक है कि बीते दो वर्षों में दंतेवाड़ा जिले में जब सबसे ज्यादा राशि डीएमएफ के माध्यम से हासिल हुई इसका बड़े पैमाने पर दुरूपयोग प्रारंभ हो गया है। विकास कार्यों के नाम पर संसाधनों की लूट का खुला खेल संचालित हो रहा है। दंतेवाड़ा जिला प्रशासन आर्थिक गड़बड़ियों का केंद्र बन गया है।

यहां जिला कलेक्टर के नेतृत्व में जिला प्रशासन ने गरीब और वंचितों के साथ आदिवासियों के हक के पैसे का बड़े पैमाने पर दुरूपयोग किया है। इस राशि की बंदरबाट के कई उदाहरण मीडिया की खबरों में लगातार बने हुए हैं। महोदय की जानकारी के लिए निम्नानुसार विवरण प्रस्तुत कर रहा हूं ताकि छत्तीसगढ़ में अब क्रियाशील हो चुकी भारतीय जनता पार्टी की सरकार के माध्यम से पूर्व कार्याकल के दौरान की निष्पक्ष जांच के साथ दोषियों के खिलाफ सीधी कार्यवाई की जा सके।

दंतेवाड़ा जिले में छत्तीसगढ़ का दूसरे नंबर पर सबसे ज्यादा जिला खनिज न्यास यानी डीएमएफ की राशि पहुंचती है। एक अनुमान है कि वर्ष 2021—22 और 2022—23 के बीच करीब 1200 करोड़ रुपए प्राप्त हुए।

इस राशि के लिए सरकार द्वारा जारी की गई गाइड लाइन का उपयोग करते हुए डीएमएफ न्यास समिति की बैठक से कार्य का अनुमोदन किया जाना होता है। जुलाई 2022 में इस समिति की अंतिम बैठक हुई थी।

बीते पांच वर्षों में दंतेवाड़ा जिले में डीएमएफ और सीएसआर मद से हजारों करोड़ रुपए हासिल हुए। इसके सर्वेसर्वा जिले के कलेक्टर को बनाया गया है। डीएमएफ एवं सीएसआर मद से होने वाले कार्यों के लिए जिला निर्माण समिति का गठन जिला स्तर पर किया गया है।

इस मद के तहत सन 2021 से 2023 के बीच में सबसे ज्यादा कार्य स्वीकृत किए गए। इसके तहत निर्माण कार्यों के संपदान के लिए ठेका पद्धति का उपयोग किया गया है।

ठेका पद्धति के लिए निमयानुसार विज्ञापन पश्चात ओपन टेंडर की प्रक्रिया का पालन करना होता है। जिसके लिए शासन की स्पष्ट गाइड लाइन है। इस ठेका से पहले कार्य के अनुसार तकनीकी स्वीकृति और प्रशासकीय स्वीकृति की प्रक्रिया का पालन किया जाना होता है।

इसके तहत पहले डीएमएफ न्यास की बैठक में कार्य योजना को स्वीकृति प्रदान करना होता है। इसके बाद स्वीकृत कार्यों का विवरण या तो राज्य सरकार के अधीन कार्यरत एजेंसी को प्रदान किया जाना होता है। या स्वयं जिला निर्माण समिति के माध्यम से जिला कलेक्टर अपनी व्यवस्था कायम कर सकते हैं।

जिला निर्माण समिति में अध्यक्षता कलेक्टर की होती है। इसमें जिले के पुलिस अधीक्षक, जिला पंचायत सीईओ, वन मंडलाधिकारी, जिला कोषालय अधिकारी, लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन अभियंता, ग्रामीण यांत्रिकी विभाग के कार्यपालन अभियंता और जल संसाधन विभाग के कार्यपालन अभियंता शामिल होते हैं।

इस समिति के द्वारा कार्यों की स्वीकृति प्रदान की जाती है। जिसमें डीएमएफ न्यास समिति की कार्ययोजना के अनुसार स्वीकृत कार्यों के लिए संबंधित निर्माण एवं क्रियान्वय एजेंसियों से तकनीकी स्वीकृति की फाइल तैयार करवाई जाती है। जिसके तहत यदि किसी जगह पर निर्माण होना हो तो उसके लिए उसकी प्लानिंग और तकनीकी पक्ष के आधार पर नक्शा तैयार कर पूरे विवरण के साथ प्रशासकीय स्वीकृति के लिए प्रस्तुत किया जाना होता है।

इसकी प्रशासकीय स्वीकृति जिला कलेक्टर प्रदान करते हैं। इस प्रशासकीय स्वीकृति के पश्चात जिला निर्माण समिति इसे अनुमोदित करती है। इस अनुमोदन के पश्चात संबंधित एजेंसी अथवा जिला निर्माण समिति स्वयं ओपन टेंडर की प्रक्रिया पूरी करती है। टेंडर की प्रक्रिया में संबंधित निर्माण एवं क्रियान्वयन एजेंसी के माध्यम से नियमों के आधार पर ठेकेदार को वर्क आर्डर प्रदान किया जाना होता है।

ओपन टेंडर के लिए लागत के आधार पर स्थानीय, राज्य स्तर के और राष्ट्रीय अखबार में विज्ञापनों का प्रकाशन जनसंपर्क विभाग अथवा संवाद के माध्यम से प्रकाशित करना अनिवार्य है। किसी भी टेंडर के करीब दो सप्ताह पूर्व विज्ञापनों का प्रकाशन अनिवार्य है। इसके अलावा सरकार वेब साइट और जिला प्रशासन की वेब साइट पर संबंधित टेंडर का विज्ञापन सार्वजनिक किया जाना होता है। इसकी प्रति जिला कार्यालय के साथ—साथ संबंधित विभाग के सूचना पटल पर चस्पा करना अनिवार्य है।

दंतेवाड़ा जिले में डीएमएफ के तहत करवाए जा रहे अधिकतर निर्माण कार्यों में इन सभी तकनीकी बिंदुओं का पालन नहीं किए जाने की शिकायत है। करोड़ों रुपए के ठेके के लिए जिस तरह की प्रक्रिया का पालन किया गया है। इससे हर तरह से भारी पैमाने में गड़बड़ी का अंदेशा है। क्योंकि एक ही कार्य के लिए जिले में कलेक्टर ने अपने हिसाब से संबंधित विभाग से वर्क आर्डर जारी करवाते रहे। और टेंडर में स्वीकृत कार्यों को निरस्त करते रहे।

बीते डेढ़ वर्ष में सबसे बड़ी गड़बड़ी कृष्णा इंटरप्राइजेस के माध्यम से करवाए जा रहे निर्माण एवं सप्लाई के कार्यों को लेकर है। इस फर्म की विधि सम्मत कार्यक्षमता यानी निर्माण एजेंसी के लिए निर्धारित नियमों के अंतर्गत और शासन के आदेशों के अनुपालन के मुताबिक होना चाहिए थी जो कि नहीं है।

एक ही एजेंसी के नाम पर सैकड़ों करोड़ के कार्य जिसमें पौधों की सप्लाई से लेकर सड़क और बड़े निर्माण कार्यों को शामिल किया गया है। इस एजेंसी के नाम पर जिस तरह से निर्माण और सप्लाई को लेकर जिला प्रशासन की भूमिका प्रदर्शित है। इससे स्वाभाविक तौर पर यह संदेह उत्पन्न हो रहा है कि इस निर्माण एजेंसी के साथ जिला प्रशासन की संलिप्तता परिलक्षित हो रही है।

ऐसा कैसे हो सकता है कि प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत जिला निर्माण समिति के माध्यम से स्वीकृत सड़क निर्माण को नियमों से विपरित जाकर स्वीकृत किया जाए। प्रशासकीय स्वीकृति के आदेश में जिन नियमों का पालन अनिवार्य है। मसलन डामर प्लांट और अन्य व्यवस्था की अनुपलब्धता के बावजूद कार्य को स्वीकृत कर वर्क आर्डर प्रदान किया गया।

इस फर्म को तालाब निर्माण के लिए करोड़ों की राशि अग्रिम देदी गई। प्रशासकी आदेश के नियमों का अनदेखा कर कृषि विभाग, उद्यान विभाग के तहत खेतों की फेंसिंग और पौध रोपण के लिए करोड़ों का भुगतान किया जाए। बोर खुदाई के लिए निर्धारित पैमाना से ज्यादा करीब ढाई गुना तक का भुगतान इस योजना के तहत इसी एजेंसी को किया गया। पांच एकड़ में पौध रोपण के लिए 32 लाख रुपए के पौधों की खरीदी दर्शाई गई। पर पांच एकड़ में 32 हजार पौधों का रोपण असंभव है।

एक ही फर्म को काम देने के लिए नियमों को शिथिल करने की दृष्टि से टीएस और एएस के कई—कई टुकड़े किए गए। ताकि निर्धारित राशि कम से कम दर्शाई जा सके। पर सारे भुगतान एक ही फर्म अथवा उससे जुड़े फर्मों को ही किया गया है।

इस फर्म के संचालक के बारे में यह जानकारी है कि इसके प्रोपराइटर केतन पटेल हैं। जो किसी समय गरियाबंद में किसी पंचायत के तकनीकी सहायक के पद पर कार्यरत रहे। उन्होंने अपने नौकरी से त्यागपत्र दिया है या नहीं इसकी जानकारी फिलहाल किसी के पास नहीं है।

इस व्यक्ति को लेकर संशय इसलिए है कि इस जिले में वर्तमान में जिला कलेक्टर विनीत नंदनवार वहां अतिरिक्त कलेक्टर के पद पर कार्यरत रहे। इस तथ्य के कारण यह आशंका है कि जिले में डीएमएफ के तहत सारे कार्यों का ठेका किसी व्यक्तिगत लाभ की मंशा से उक्त फर्म कृष्णा इंटरप्राइजेस को ही प्रदान किया जा रहा है।

दंतेवाड़ा जिले में डीएमएफ के तहत बीते दो वर्षों के स्वीकृत और क्रियाशील कार्यों की जानकारी को पूरी तरह से गुप्त रखने की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। जिसके तहत आर्थिक अनियमितता का ज्यादा संदेह उत्पन्न हो रहा है।

सैकड़ों के करोड़ के निर्माण कार्यों में आर्थिक गड़बड़ियों को लेकर विस्तृत जांच की आवश्यकता है। विशेषकर क्रियाशील फर्म कृष्णा इंटरप्राइजेस के समस्त बैंक खातों के लेन—देन और जीएसटी बिल के साथ इस फर्म को ठेका प्रदान करने के लिए उपयोग में लाई गई सर्पोटिंग फर्म की भी जांच अनिवार्य है। क्योंकि करीब चार फर्मों का एक सिंडिकेट बनाकर कई बड़े ठेकों के लिए दर तय करने में उपयोग किया गया है।

ऐसा कैसे संभव हो सकता है कि ज्यादातर टेंडर के लिए केवल इन्हीं संबंधित फर्मों के फार्म जमा किए गए। स्क्रूटनी किए गए। और इनके नाम पर कार्यादेश जारी किया गया। ऐसा कैसे संभव है कि दक्षिण बस्तर के अंदरूनी ग्राम पंचायतों में इन्हीं फर्मों को वेंडर बनाकर भुगतान किया गया।

ऐसा कैसे संभव है कि इतने बड़े जिले में जहां बड़ी तादात में युवा बेरोजगार अन्यान्य तरह के कार्यों के लिए इधर—उधर भटकने के लिए बाध्य हैं। वहां इन बाहरी फर्मों को लगातार निष्कंटक तरीके से सारे टेंडर प्राप्त हो रहे हैं वे भी सभी कलेक्टर विनीत नंदनवार की पदस्थापना के बाद ही।

महोदय से निवेदन है कि उक्त प्रकरण की विस्तृत जांच कर दोषियों के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण दर्ज कर कार्रवाई की जाए।

निवेदनकर्ता
सुरेश महापात्र

सादर प्रतिलिपि

माननीय मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़ शासन, रायपुर।