Saturday, January 24, 2026
news update
National News

कोई भी नियोक्ता किसी भी कर्मचारी को उसे उसकी पसंद के अस्पताल में इलाज कराने से नहीं रोक सकता है : हाई कोर्ट

नई दिल्ली
अगर आप सरकारी कर्मचारी हैं या किसी भी ऐसी कंपनी या संस्थान में काम करते हैं, जहां मेडिकल रिम्बर्समेंट की सुविधा है, तो ये खबर आपके लिए खास है। केरल हाई कोर्ट ने हाल ही में एक आदेश में कहा है कि कोई भी नियोक्ता किसी भी कर्मचारी को उसे उसकी पसंद के अस्पताल में इलाज कराने से नहीं रोक सकता है। कोर्ट ने ये भी कहा कि अगर किसी कर्मचारी ने नियोक्ता या कंपनी के पैनल से बाहर के किसी दूसरे अस्पताल में इलाज करा लिया है तो उसके बिलों का भुगतान करने से इनकार नहीं किया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि कर्मचारी किस अस्पताल में इलाज कराएगा, यह उसका अधिकार है।

पीटी राजीवन बनाम भारतीय खाद्य निगम के मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस जी गिरीश की पीठ ने कहा कि सरकारी संस्थानों द्वारा जारी सर्कुलर, जो कर्मचारियों को अपनी पसंद के अस्पताल में इलाज कराने से रोकता या सीमित करता है,  कर्मचारी मुआवजा अधिनियम की धारा 4(2ए) का उल्लंघन है। कोर्ट ने कहा कि ये अधिनियम कार्य-संबंधित चोटों के लिए मेडिकल खर्च की भरपायी करने की अनुमति देता है।

इस मामले में राजीवन नाम के कर्मचारी, जो भारतीय खाद्य निगम में कार्यरत थे, अपनी ड्यूटी के दौरान घायल हो गए थे। उन्होंने अपनी पसंद के अस्पताल में अपना इलाज कराया, जिसका खर्च 35000 रुपये आया। उन्होंने इस मेडिकल बिल के भुगतान के लिए जब भारतीय खाद्य निगम के दफ्तर में कागजात जमा किए तो यह कहते हुए उनके बिलों का भुगतान करने से इनकार कर दिया गया कि उन्होंने निगम के पैनल के अस्पतालों से इतर किसी अन्य अस्पताल में इलाज कराया है, इसलिए उसके खर्च का भुगतान नहीं किया जा सकता है।

राजीवन ने इसके खिलाफ ट्रिब्यूनल में अपील की, जहां ट्रिब्यूनल ने 12 फीसदी ब्याज के साथ कुल भुगतान करने का आदेश दिया लेकिन भारतीय खाद्य निगम ने उस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दे दी। इसी मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस जी गिरीश ने आदेश दिया कि कर्मचारियों को यह अधिकार है कि वह अपनी पसंद के किसी भी अस्पताल में इलाज कराएं, भले ही वह उसके नियोक्ता के पैनल में लिस्टेड हो या नहीं? हाई कोर्ट ने ये भी कहा कि ऐसे अस्पतालों में हुई खर्च की राशि का भुगतान करने से नियोक्ता इनकार नहीं कर सकते।

 

error: Content is protected !!