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त्वरित टिप्पणी। सुरेश महापात्र।

छत्तीसगढ़ ने अपने लिए नया मुख्यमंत्री चुन लिया है। पहले विधायकों को बहुमत देकर जनता ने अपने हिस्से का काम कर दिया था। इसके बाद बीते सात दिनों से सबसे बड़ी पहेली बनी हुई थी कि आखिर छत्तीसगढ़ का चौथा मुख्यमंत्री कौन होगा? इस बार छत्तीसगढ़ के लिए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की भाषा में बड़े आदमी बनाने की जिम्मेदारी जनता की थी।

जनता ने शाह की सभा में जिनके लिए बड़े आदमी बनाने के लिए वोट मांगे थे। जनता ने कुनकुरी में विष्णुदेव साय और रायगढ़ में ओम प्रकाश चौधरी को जीताकर भेज दिया था। अब बारी थी वादा निभाने की। दो—तीन दौर में रायशुमारी के बाद भी यह स्पष्ट नहीं था कि आखिर भारतीय जनता पार्टी छत्तीसगढ़ के लिए 2024 से पहले किसे अपना चेहरा बनाएगी।

आज कुशाभाउ ठाकरे परिसर में प्रदेश के सभी भाजपा विधायकों की मौजूदगी में इस बात का ऐलान कर दिया गया कि प्रदेश में आदिवासी और अनुभवी नेतृत्व के नाम पर विष्णुदेव साय के चेहरे पर मुहर लगा दी गई। विष्णुदेव साय पूर्व केंद्रीय मंत्री रहे। तीन बार सांसद रहे। तीन बार भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष भी रहे। इस बार चुनाव से करीब छह महीने पहले विष्णुदेव साय को भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाकर सांसद अरूण साव को अध्यक्ष का पद सौंप दिया गया था।

इसके बाद कांग्रेस ने विश्व आदिवासी दिवस के दिन आदिवासी प्रदेश अध्यक्ष के पद से हटाने को लेकर माहौल बनाने की कोशिश की थी। अब भाजपा ने पहले से बड़ी जिम्मेदारी सौंपकर यह जता दिया है कि भाजपा विशेष रणनीति के तहत साय को हटाया और रणनीति के तहत मुख्यमंत्री का पद सौंप दिया है। इसके बाद दूसरा बड़ा चेहरा बनकर उभरे हैं रायगढ़ से विधायक ओपी चौधरी। करीब पैंसठ हजार मतों के अंतर से विजयी होकर ओपी चौधरी विधानसभा पहुंचे हैं।

इन्हें लेकर पहले यह भी हल्ला मचा कि ओबीसी वर्ग से बड़ा चेहरा होने के कारण पूर्व ब्यूरोक्रेट ओपी चौधरी भी सीएम फेस हो सकते हैं। भाजपा कें केंद्रीय नेतृत्व ने ओपी को डिप्टी सीएम की जिम्मेदारी सौंपकर भविष्य के लिए युवा नेतृत्व को तैयार करना का संकेत दे दिया है। इस प्रकार से एक शानदार केमिस्ट्री अनुभवी और युवा के साथ दो बड़े आदमी अब प्रदेश का नेतृत्व करेंगे।