Saturday, January 24, 2026
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PROJECT ‘अतुल्य दंतेवाड़ा’ : मां दंतेश्वरी कारिडोर से एक दशक बाद फिर बदलेगी तस्वीर…

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सुरेश महापात्र।

काशी विश्वनाथ और महाकाल की तर्ज पर छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में ढोलकल के गणेश से लेकर बारसूर के बत्तीसा तक दिखेगा बदलाव

दंतेवाड़ा जिले में स्थित माता दंतेश्वरी मंदिर की ख्याति शक्तिपीठ के तौर पर पूरी दुनिया में है। बस्तर की अराध्या देवी के इस पावन मंदिर के रख रखाव की तमाम जिम्मेदारियों का निर्वहन पुरात्व विभाग करता रहा है। मंदिर के धरोहर के तौर पर सुरक्षित हिस्से से बाहर इसके सौंदर्यीकरण की कोशिशें कई बार की गईं। करीब एक दशक पहले जब दंतेवाड़ा में कलेक्टर के तौर पर ओमप्रकाश चौधरी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे थे तब बाहरी हिस्से में सबसे बड़े बदलाव की नींव रखी गई।

एक मुख्यद्वार तैयार कर मंदिर पहुंचने के लिए कारीडोर बनाया गया। इसके साथ ही मंदिर परिसर पर स्थित मेंडका डोबरा मैदान का विकास किया गया। मंदिर के चारों ओर डामर की सड़कें और भव्य सामुदायिक भवन तैयार किया गया। साथ ही करीब चालीस ​फीट उंची हनुमान की प्रतिमा स्थापित की गई। कारीडोर से सटे स्थान पर त्रिदेव स्थानम की स्थापना भी की गई।

इससे पहले बस्तर कमिश्नर गणेश शंकर मिश्रा के कार्यकाल में माता की बगिया समेत कई काम किए गए। तब कलेक्टर केआर पिस्दा के बाद शिशुपाल सोरी दंतेवाड़ा के कलेक्टर हुए। इनके बाद दंतेवाड़ा में कलेक्टर के तौर पर रीना बाबासाहेब कंगाले आईं उन्होंने भी मंदिर परिसर के काम के साथ वर्तमान में गीदम से सटे जावांगा में नक्सल प्रभावित बच्चों की शिक्षा के लिए आस्था गुरूकुल के भवन की योजना तैयार करवाई। उसका काम उनके काम को सबसे बड़ा विस्तार देते हुए इसी जावंगा में कलेक्टर ओम प्रकाश चौधरी ने एजुकेशन सिटी की परिकल्पना को साकार किया।

जावंगा एजुकेशन सिटी में शिक्षा से जुड़ी तमाम व्यवस्थाएं एक ही जगह पर की गईं। अब यहां मेडिकल कॉलेज की तैयारी चल रही है। करीब दो सौ एकड़ में फैले इस जगह में पहली बार एनएमडीसी के सीएसआर के मिलने वाली करोड़ों रूपए का उपयोग किया गया। दंतेवाड़ा में पहले सीएसआर से मिलने वाली रकम का उपयोग कलेक्टर अपने हिसाब से ही करते रहे। किसी ने विकास के प्रारूप पर काम किया तो किसी ने सौंदर्यीकरण को प्राथमिकता में जोड़ने की कोशिश् की। तो किसी ने रोजगार और विकास का साझा करने का प्रयास किया।

दंतेवाड़ा में अधिष्ठाता माता दंतेश्वरी देवी का मंदिर यहां की आस्था का सबसे बड़ा केंद्र है। मंदिर परिसर में नवरात्रि और फागुन मंडई के दौरान हजारों की संख्या में भक्तों का तांता लगा रहता है। हजारों की संख्या में ज्योति कलश प्रज्वलित किए जाते हैं। शंकिनी और डंकिनी के संगम पर स्थित इस मंदिर में पर्यटन की संभावनाओं का विस्तार देने की कई बार कोशिश की गई। पहले सीएसआर अब ​डीएमएफ से मिलने वाली राशि का उपयोग इस क्षेत्र के पर्यटन विकास की संभावनाओं पर व्यय किया जाता रहा है।

वर्तमान में डंकिनी नदी पर रिवर फ्रंट के विकास की बुनयादी सोच के साथ माता दंतेश्वरी कारिडोर की परिकल्पना को मूर्तरूप देने का काम तेजी से चल रहा है। एक दशक के बाद दंतेवाड़ा में माता के मंदिर के चारों ओर काशी, उज्जैन की तर्ज पर दंतेवाड़ा कारिडोर के निर्माण का काम चल रहा है। इस परियोजना को ‘अतुल्य दंतेवाड़ा’ नाम दिया गया है।

9 मार्च 2023 को पहली बार फागुन मंडई में देवी—देवताओं के विदाई कार्यक्रम में पहुंचे मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने घोषणा की थी कि डंकिनी नदी पर रिवर फ्रंट बनाया जाएगा। डंकनी नदी का सौंदर्यीकरण होने से दंतेश्वरी मंदिर के दर्शन के लिए दूरदराज आने वाले इसका आनंद ले सकेंगे। कलेक्टर विनीत नंदनवार ने बताया इसके बाद राम वनगमन पथ से जुड़े माता दंतेश्वरी शक्तिपीठ के लिए एक विस्तृत योजना तैयार की गई। इस योजना का मुख्य उद्देश्य पर्यटन से रोजगार को जोड़ना है। 

इसके लिए पूरे जिले में कई काम एक साथ किए जा रहे हैं। बारसूर, बचेली, किरंदूल, कटेकल्याण के साथ ही दंतेवाड़ा में मंदिर परिसर के आस—पास और रिवर फ्रंट पर काम किया जा रहा है। पहले फेस में रिवर फ्रंट और माता दंतेश्वरी मंदिर के प्रवेश द्वार से लेकर मंदिर तक और उसके आस—पास के जगहों को योजना के अनुसार मुर्तरूप देने की कोशिश की जा रही है।

कलेक्टर विनीत नंदनवार ने बताया अतुल्य दंतेवाड़ा की इस परियोजना की कुल लागत करीब 32 करोड़ रुपए है। जिसमें सारे कार्यों का पूरा किया जाना है। रिवर फ्रंट और वर्तमान प्रवेश द्वार के नवीन विकास कार्य को लेकर रायपुर के आर्किटेक्ट और एनआईटी के प्राध्यापकों की टीम का सहयोग लिया जा रहा है। पूरा प्रोजेक्ट तैयार है इसके पहले फेस को हर हाल में 30 सितंबर तक पूरा करने की कोशिश की जा रही है।

श्री नंदनवार कहते हैं कि ‘दंतेवाड़ा जिले में अपार संभावनाएं हैं इसमें रोजगार सृजन के काम को करने के लिए योजना तैयार कर ही सही दिशा दी जा सकती है। पर्यटन की अपार संभावनाओं वाले इस क्षेत्र में होम स्टे से बड़ी संख्या में युवाओं को रोजगार का अवसर मिल सकेगा। यदि पर्यटक केवल मंदिर दर्शन करने की जगह आस—पास के इलाकों को एक्सप्लोर करना चाहेंगे तो उसके लिए सबसे पहले उसके सुनियोजित विकास की दरकार है। ‘अतुल्य दंतेवाड़ा’ की परिकल्पना का मूल यही है।’

वे कहते हैं हमारे पास ढोलकाल में श्रीगणेश की पाषाण प्रतिमा के साथ विहंगम दृश्य है। वहां तक पहुंच के लिए प्राकृतिक स्थल से पहले तक वहां स्टे और सौंदर्यी करण की जरूरत थी जिसे पूरा किया जा रहा है। बारसूर के पुरातात्विक धरोहर बत्तीसा मंदिर है तो प्राकृतिक सौंदर्य का बोध कराती इंद्रावती का लंबा तटीय क्षेत्र है। इसमें बारसूर सातधार पर्यटन की दृष्टि से संभावनाओं को संजोए हुए है। 

यदि कोई बारसूर में बत्तीसा मंदिर देखने जाए तो पुरातात्विक इस स्थल के स्वागत द्वार को भी उसके जैसा ही होना चाहिए। वहां आस—पास में प्राकृतिक स्थलों का सौंदर्यीकरण पर्यटकों का बांधने का काम कर सकेगा। यदि कोई पर्यटक समूह दंतेवाड़ा आए तो उसे आस—पास एक्सप्लोर करने के लिए कम से कम तीन दिन का पैकेज हो जिसमें ठहरने और खाने की सुविधा के साथ देखने लायक स्थान भी होना चाहिए।

कलेक्टर श्री नंदनवार के तर्क तर्कसंगत लगते हैं। जब वे पर्यटन की धुरी पर विकास और रोजगार सृजन की योजना पर अपना नजरिया बताते हैं। पूर्ववर्ती कई कलेक्टरों ने अपने—अपने तरीके से कई प्रयोग किए। इसमें एनएमडीसी से मिलने वाली राशि का उपयोग और दुरूपयोग दोनों हुआ। कई परियोजनाएं विफल साबित हुईं। 

इसके बावजूद एजुकेशन सिटी, छू लो आसमान, कमर्शियल सिलाई यूनिट डैनेक्स ब्रांड की सफलता के साथ साथ बहुत सी कुटीर उद्योगों पर काम हो रहा है। पूर्ववर्ती कलेक्टरों की कई पहल को मिली निरंतरता से यह स्थापित भी होता दिख रहा है कि अब प्रशासन दूरगामी परिणामों के आधार पर विकास की दिशा में प्रयोग कर रहा है।

अभी भी एक वर्ग ऐसा है जो डिस्ट्रिक्ट मिनरल फंड के बेजा इस्तेमाल को लेकर आवाज उठाता है। उनकी शिकायत इस बात को लेकर है कि बड़े प्रोजेक्ट में बड़ी लागत खर्च करने की जगह गांवों की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने पर फोकस किया जाना चाहिए। मंदिर परिसर में चल रहे रिवरफ्रंट के समर्थकों का साफ करना है कि ‘इसे लेकर हर किसी का अपना पृथक नजरिया हो सकता है। विकास और सौंदर्यीकरण को लेकर भले ही डीएमएफ की राशि के व्यव पर लोग सवाल खड़े करें पर यह भी देखा जाना चाहिए कि पर्यटन की भूमिका रोजगार के लिए सबसे महत्वपूर्ण है।’

वे कहते हैं कि ‘माता दंतेश्वरी मंदिर के परिसर में भक्तिभाव के साथ स्थानीय लोगों के आर्थिक विकास का जरिया तभी विकसित हो सकेगा जब यहां भक्ति के साथ पर्यटन का केंद्र भी मजबूती के साथ आगे बढ़े।’ अच्छी बात यह है कि इस व्यापक निर्माण परियोजना के खिलाफ अब तक किसी ने भी विरोध दर्ज नहीं करवाया है। एक साल पहले यहां पदस्थ कलेक्टर विनीत नंदनवार ने दंतेवाड़ा जिले के सभी वर्गों का साध लिया है। करोड़ों की लागत से हो रहे इस विकास कार्य के लिए हर कोई उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर अपना सहयोग प्रदान कर रहे हैं। निर्माण एजेंसी रात—दिन मंदिर परिसर में इस कार्य को पूरा करने के लिए तत्पर हैं। वे दावा करते कहते हैं कि ‘यही वजह है कि ‘अतुल्य दंतेवाड़ा’ की परियोजना को लेकर दंतेवाड़ा में तमाम राजनीति मतभेदों के बाद भी विपक्ष का पूरा कैडर साथ खड़ा दिखाई दे रहा है।’

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