Monday, March 2, 2026
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फॉलोअप : समग्र में वित्त नियंत्रक की आपत्ति से ट्रांसपोर्टेशन का टेंडर रुका था… इम्पेक्ट की खबर के बाद पुरानी व्यवस्था बहाल, गोदाम में डंप पड़ी किताबें अब जिलों को सौंपने की प्रक्रिया 9 से…

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इम्पेक्ट न्यूज। रायपुर।

हमने 22 फरवरी 2026 को एक्सक्लूसिव खबर छापी थी कि समग्र शिक्षा एवं पीएमश्री योजना के तहत खरीदी गई 20 करोड़ रुपये की स्कूल लाइब्रेरी किताबें भनपुरी (रायपुर) के केंद्रीय भंडार निगम के गोदाम में चार महीने से सड़ रही हैं। ट्रांसपोर्टेशन की व्यवस्था न होने से धन और ज्ञान दोनों का नुकसान हो रहा था।

उक्त समाचार में समग्र शिक्षा के उप संचालक एवं पुस्तकालय प्रभारी राजेश सिंह ने साफ-साफ स्वीकार किया था,

“पहले जिलों को राशि दे दी जाती थी जिससे वे अपनी सुविधा के अनुसार पुस्तकों का ट्रांसपोर्ट करवा लेते थे। इस बार टेंडर करके ट्रांसपोर्ट करने की प्रक्रिया को वित्त नियंत्रक की आपत्ति के चलते रोक दिया गया जिससे यह स्थिति निर्मित हुई है।”

अब ठीक 10 दिन बाद, 2 मार्च 2026 को राज्य परियोजना कार्यालय ने वही पुरानी व्यवस्था बहाल कर दी। पत्र क्रमांक 2616/समग्र शिक्षा/पुस्तकालय/2025-26 जारी कर सभी 33 जिलों को कुल 37,75,000 रुपये की परिवहन राशि (लोडिंग-अनलोडिंग सहित) जारी कर दी गई है। यह राशि रायपुर से दूरी के आधार पर 20,000 से 30,000 रुपये तक जारी कर दी गई है।

इम्पेक्ट लगातार

छत्तीसगढ़: स्कूल लाइब्रेरी की 20 करोड़ की किताबें गोदाम में सड़ रही हैं, ट्रांसपोर्टेशन के नाम धन और ज्ञान का नुकसान!

9 मार्च 2026 से शुरू हो रहे पिक-अप शेड्यूल के अनुसार जिलों को भनपुरी, पाठ्य पुस्तक निगम के भनपुरी भंडारगृह  रायपुर से ईओआई वाली किताबें और विकासखंड स्तर से सीआईएल-एनबीटी वाली किताबें उठाकर स्कूलों तक पहुंचानी होंगी।

सुबह 10 बजे और दोपहर 2 बजे के दो स्लॉट बनाए गए हैं। हर किताब के कवर पेज तथा अंदर कम से कम 10 पेज पर स्कूल का शील मोहर अनिवार्य रूप से लगाना होगा।

उपयोगिता प्रमाण-पत्र वित्त शाखा और पुस्तकालय शाखा, रायपुर में जमा करना अनिवार्य होगा तथा प्राप्ति पावती जिला स्तर पर सुरक्षित रखनी होगी। राशि का व्यय भंडार क्रय नियमों के तहत मितव्ययिता से करना होगा।

जब पुरानी व्यवस्था (जिलों को राशि देकर खुद ट्रांसपोर्ट करवाने वाली) पहले से सफलतापूर्वक चल रही थी, तो नई टेंडर प्रक्रिया शुरू करके और फिर वित्त नियंत्रक की आपत्ति से रोककर क्यों यह गड़बड़ी की? चार महीने तक 20 करोड़ की किताबें गोदाम में क्यों सड़ीं? छात्रों को ज्ञान से वंचित क्यों रखा गया?

क्योंकि वित्त नियंत्रक के चलते मौजूदा सत्र में पढ़ाई कर रहे 10वीं और 12वीं के बच्चों को इसका लाभ ही नहीं मिल सकेगा। अंदरूनी खबर यह भी है कि पूर्व में समग्र के वित्त नियंत्रक के द्वारा कई नियमों को ताक में रखकर परिवहन करवाए जाने के कारण इस सत्र में पूरी प्रक्रिया को लेकर नए विचार प्रारंभ हुआ था। जिसके चलते यह परेशानी बढ़ गई।

इम्पेक्ट की खबर के बाद हुई तेज कार्रवाई से साफ है कि विभाग अब पुरानी व्यवस्था पर लौट आया है, लेकिन जो नुकसान हो चुका है उसे कौन भरपाई करेगा? इम्पेक्ट लगातार नजर रखेगी कि 9 मार्च से शुरू होने वाली प्रक्रिया में किताबें वाकई स्कूल पहुंचती हैं या फिर कोई नई अड़चन खड़ी की जाती है।

स्कूल लाइब्रेरी के नाम किताबों के खेल पर पड़ताल की रिपोर्ट अगले अंक में