Friday, January 23, 2026
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दुनिया के लिए माओवादी आतंक का चेहरा और पुवर्ती के हीरो हिड़मा का पत्नी राजे के साथ अंतिम संस्कार

आस—पास के गांव के सैकड़ों ग्रामीण पहुंचे पूरा माहौल रहा गमगीन

दिलीप देवांगन. पुवर्ती से लौटकर।

छत्तीसगढ़- आंध्र प्रदेश बॉर्डर पर हुए मुठभेड़ में मारे गए नक्सली माड़वी हिड़मा और उसकी पत्नी राजे का गुरुवार को पूवर्ती गांव में अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में आस—पास के गांवों के लोग मौजूद थे। सभी गमगीन थे। पुवर्ती का पूरा गांव रो रहा था आखिर उनके हीरो की मौत का मातम था। हिड़मा और राजे दोनों को अंतिम विदाई दी गई। अंतिम विदाई के दौरान हिडमा के शव पर काली पैंट-शर्ट डाली गई। वहीं उनकी पत्नी राजे के शव को लाल जोड़े से सजाया गया।

सैकड़ों ग्रामीणों की मौजूदगी में हिड़मा और उसकी पत्नी राजे की अंतिम यात्रा निकाली गई। शवयात्रा के आस- पास के क्षेत्र के ग्रामीण पहुंचे हुए थे जो रोते हुए दिखाई दिए। इसके बाद गांव के ही जंगल में हिडमा और राजे को एक ही चिता पर मुखाग्नि दी गई। वहीं माड़वी हिड़मा को अंतिम विदाई देने के लिए आदिवासी नेता और सामाजिक कार्यकर्ता सोनी सोढ़ी उसके घर पहुंची इस दौरान वह हिडमा के शव से लिपटकर रोती- बिलखती हुई नजर आई।

जानिए कौन था हिड़मा
हिड़मा का जन्म दक्षिण सुकमा के पूर्वती गांव में एक आदिवासी परिवार में हुआ था। वह महज 15 साल की उम्र में ही नक्सल संगठन से जुड़कर काम करने लगा। इसी दौरान उसने नक्सलियों के एजुकेशन सिस्टम और कल्चरल कमेटी से उसने पढ़ना-लिखना और गाना-बजाना सीखा। इसके बाद ट्रेनिंग पूरी होते ही उसकी पहली पोस्टिंग महाराष्ट्र के गढ़चिरौली इलाके में हुई।

सबसे युवा सेंट्रल कमेटी मेंबर था हिडमा
हिडमा सेंट्रल कमेटी का सबसे युवा सदस्य था। नक्सल संगठन में काम करते- करते वह नक्सलियों के खतरनाक चेहरों में शामिल हो गया। हिडमा पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (PGLA) की बटालियन-1 का चीफ और माओवादी स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZ) का भी सदस्य था। वह सीपीआई (माओवादी) की 21 सदस्यीय सेंट्रल कमेटी में भी शामिल था।

रमन्ना की मौत के बाद बना शीर्ष कमांडर
हिड़मा कई बड़े नक्सल घटनाओं में सीधे तौर पर शामिल रहा है। इनमें झीरम, बीजापुर और बुर्कापाल हमले का नेतृत्व भी हिडमा ने ही किया था। वहीं दंतेवाड़ा हमला भी हिडमा के नेतृत्व में हुआ था इस हमले में 76 जवान शहीद हुए थे। इस हमले के बाद से संगठन में हिडमा की हैसियत बढ़ गई। कहा जाता है कि, 2019 में रमन्ना की मौत के बाद हिडमा को नक्सलियों का शीर्ष कमांडर बना दिया गया था।

आंध्र प्रदेश में हिड़मा की हत्या की गई : सोनी सोरी

हिड़मा के अंतिम संस्कार में पहुंची सामाजिक कार्यकर्ता सोनी सोढ़ी ने हिड़मा की हत्या का आरोप लगाया। न्याय के लिए कोर्ट जाने की बात भी उन्होंने कही। उन्होंने कहा कि हिड़मा आदिवासी था इसलिए मार दिया गया। जब देवजी को गिरफ्तार करना बताया जा रहा है तो हिड़मा को क्यों मारा गया? एक मीडिया कर्मी से चर्चा करते हुए सोनी सोरी ने यह भी बताया कि उन्होंने मृत हिड़मा को काले कपड़े इसलिए चढ़ाए क्योंकि वह क्रांतिकारी था। सुश्री सोरी ने कहा कि जिस तरह से गूंडाधूर एक क्रांतिकारी था वह तीर—कमान से आजादी की लड़ाई में शामिल था बिल्कुल उसी तरह से हिड़मा भी बंदूक के साथ मैदान में आदिवासी हक के लिए लड़ रहा था। सोनी सोरी ने बातचीत में यह भी स्पष्ट किया कि वे सशस्त्र हिंसा का समर्थन नहीं करती हैं पर यदि आंध्र के नक्सली को गिरफ्तार किया गया तो बस्तर के आदिवासी की हत्या क्यों की गई।

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