Saturday, January 24, 2026
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पीएम मोदी ने जारी की पीएम-किसान किस्त, 9 करोड़ किसानों के खातों में पहुँचे 18,000 करोड़ रुपए

कोयंबटूर (तमिलनाडु) 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को तमिलनाडु के कोयंबटूर में ‘दक्षिण भारत प्राकृतिक खेती शिखर सम्मेलन’ को संबोधित किया और पीएम किसान सम्मान निधि की 21वीं किस्त जारी की। प्रधानमंत्री मोदी ने पीएम किसान सम्मान निधि की 21वीं किस्त जारी की। इसके तहत देशभर के करीब 9 करोड़ से ज्यादा किसानों के बैंक खातों में सीधे 18,000 करोड़ रुपए से अधिक की राशि ट्रांसफर की गई। तमिलनाडु के लाखों किसानों को भी इस योजना का लाभ मिला। पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि पिछले 11 साल में देश के कृषि क्षेत्र में बड़ा बदलाव आया है। कृषि निर्यात लगभग दोगुना हो चुका है। सरकार ने किसानों के लिए हर तरह की मदद के दरवाजे खोल दिए हैं, ताकि खेती को आधुनिक बनाया जा सके।
उन्होंने भविष्य की योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा, “आने वाले समय में भारत प्राकृतिक खेती का विश्व केंद्र बनेगा। हमारी जैव विविधता नया रूप ले रही है। आज का युवा खेती को आधुनिक और बड़ा अवसर मान रहा है। इससे गांवों की अर्थव्यवस्था को बहुत ताकत मिलेगी।"
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "कुछ समय पहले, हमने इसी मंच से पीएम-किसान सम्मान निधि की किस्त जारी की थी। देश के सभी कोनों में किसानों को 18,000 करोड़ रुपए हस्तांतरित किए गए। तमिलनाडु के लाखों किसानों को भी पीएम-किसान सम्मान निधि के तहत उनके खातों में राशि प्राप्त हुई है।"
उन्होंने प्राकृतिक खेती को अपने दिल के बहुत करीब बताते हुए सम्मेलन के आयोजन और प्रदर्शनी की तारीफ की। उन्होंने बताया कि प्रदर्शनी में कई युवा किसानों से उनकी मुलाकात हुई। कोई मैकेनिकल इंजीनियर है, कोई पीएचडी धारक है, तो कोई नासा छोड़कर खेती कर रहा है और दूसरों को प्रशिक्षण दे रहा है।
प्रधानमंत्री ने कहा, “अगर मैं आज इस कार्यक्रम में नहीं आया होता तो जिंदगी में बहुत कुछ मिस कर देता। यहां आकर मैंने बहुत कुछ सीखा है। मैं तमिलनाडु के किसानों के हौसले और बदलाव अपनाने की ताकत को सलाम करता हूं।”
वहीं, मंच पर आते ही जब कुछ किसानों ने हवा में गमछा लहराया तो प्रधानमंत्री मुस्कुराते हुए बोले, “लग रहा है बिहार की हवा मुझसे पहले यहां पहुंच गई।”
बता दें कि कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसान, युवा और कृषि विशेषज्ञ मौजूद रहे। प्रधानमंत्री ने सभी को प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने और नई पीढ़ी को जोड़ने का आह्वान किया।

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