जीएसटी स्लैब में बड़े बदलाव को GoM की मंजूरी, सामान्य वस्तुएं होंगी सस्ती
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इम्पेक्ट न्यूज। नई दिल्ली:
जीएसटी काउंसिल के मंत्रियों के समूह (GoM) ने जीएसटी स्लैब में बड़े बदलाव को मंजूरी दे दी है। इसके तहत मौजूदा 12% और 28% के स्लैब को खत्म कर 5% और 18% के दो स्लैब को लागू करने का प्रस्ताव है। लग्जरी आइटम्स पर 40% टैक्स लगेगा। बिहार के उपमुख्यमंत्री और GoM के संयोजक सम्राट चौधरी ने बताया कि केंद्र सरकार के इस प्रस्ताव को समर्थन मिला है, हालांकि कुछ राज्यों ने आपत्तियां भी जताई हैं। अब यह प्रस्ताव जीएसटी काउंसिल के समक्ष रखा जाएगा, जो अंतिम फैसला लेगी।
क्या सस्ता होगा?
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, 12% स्लैब की वस्तुओं पर अब 5% टैक्स लगेगा। इसमें सूखे मेवे, ब्रांडेड नमकीन, टूथपेस्ट, साबुन, हेयर ऑयल, सामान्य एंटीबायोटिक्स, पेनकिलर, प्रोसेस्ड फूड, स्नैक्स, फ्रोजन सब्जियां, कंडेंस्ड मिल्क, कुछ मोबाइल, कंप्यूटर, सिलाई मशीन, प्रेशर कुकर, गीजर, बिना बिजली वाले वाटर फिल्टर, इलेक्ट्रिक आयरन, वैक्यूम क्लीनर, 1000 रुपये से ज्यादा के रेडीमेड कपड़े, 500-1000 रुपये के जूते, ज्यादातर वैक्सीन, साइकिल, बर्तन, ज्योमेट्री बॉक्स, ग्लेज्ड टाइल्स, सोलर वॉटर हीटर जैसी चीजें शामिल हैं।
वहीं, 28% स्लैब की वस्तुओं पर अब 18% टैक्स लगेगा। इसमें सीमेंट, ब्यूटी प्रोडक्ट्स, चॉकलेट, टीवी, फ्रिज, वॉशिंग मशीन, एसी, डिशवॉशर, प्रोटीन कॉन्सेंट्रेट, प्लास्टिक प्रोडक्ट्स, रबर टायर, एल्युमिनियम फॉयल, टेम्पर्ड ग्लास, प्रिंटर, रेजर, मैनिक्योर किट आदि शामिल हैं।
प्रधानमंत्री का वादा
स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि इस साल दिवाली पर जनता को बड़ा तोहफा मिलेगा। उन्होंने ‘नेक्स्ट जेनरेशन जीएसटी रिफॉर्म्स’ का जिक्र करते हुए कहा था कि सामान्य लोगों के लिए टैक्स कम होगा, जिससे रोजमर्रा की चीजें सस्ती होंगी और लोगों को बड़ा फायदा होगा।
GoM का रोल
GoM में बिहार, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक और केरल जैसे राज्यों के वरिष्ठ मंत्री शामिल हैं। यह समिति जीएसटी से जुड़े जटिल मुद्दों पर सुझाव देती है। GoM ने अपनी सिफारिशें जीएसटी काउंसिल को भेज दी हैं, जहां केंद्र और सभी राज्यों के प्रतिनिधि इस पर चर्चा करेंगे।
आगे क्या?
जीएसटी काउंसिल की अगली बैठक सितंबर या अक्टूबर 2025 में हो सकती है। अगर 75% बहुमत से प्रस्ताव पास होता है, तो केंद्र और राज्य सरकारें इसे लागू करने के लिए कानूनी और तकनीकी कदम उठाएंगी। नई दरें 2026 की शुरुआत तक लागू हो सकती हैं। कारोबारियों और उपभोक्ताओं को पहले से सूचना दी जाएगी ताकि वे इसके लिए तैयार हो सकें।
