Madhya Pradesh

महिला विधायक के दबाव में हुआ निलंबन रद्द, MP हाई कोर्ट ने माना अधिकारों का दुरुपयोग

 जबलपुर 
 हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल की एकलपीठ ने महिला विधायक के दबाव में किए गए सहकारी बैंक के सीईओ के निलंबन को अनुचित पाकर निरस्त कर दिया। इसी के साथ अविलंब बहाल करने के निर्देश दे दिए। कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा कि याचिकाकर्ता का निलंबन आदेश शक्तियों का दुरुपयोग करके महिला विधायक के दबाव में पारित किया गया है।

ट्रांसफर का मामला

दरअसल, गांधीग्राम शाखा से सीधी शाखा ट्रांसफर किए गए एक क्लर्क के तबादले को रद कराने के लिए यह कवायद की गई। विधायक ने इस मामले में पक्षपातपूर्ण तरीके से अपने अधिकार क्षेत्र का दुरुपयोग किया है। याचिकाकर्ता सीधी निवासी राजेश रायकवार की ओर से पक्ष रखा गया। दलील दी गई कि जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक की गांधीग्राम शाखा के एक क्लर्क का सीधी तबादला किया था।

याचिकाकर्ता पर लगाया यह आरोप

इससे नाराज होकर महिला विधायक (याचिका में रीति पाठक का नाम न होने की वजह से हाई कोर्ट ने यही शब्द इस्तेमाल किया) ने पांच जून, 2025 को फोन पर पहले याचिकाकर्ता को डांटा व धमकाया। इसके बाद याचिकाकर्ता पर आरोप लगाया गया कि उसने विधायक, प्रभारी मंत्री प्रदीप जायसवाल व सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग के विरुद्ध अभद्र भाषा का इस्तेमाल करके अपशब्द कहे हैं। फिर विधायक के साथ दो और विधायकों ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर जिले के प्रभारी मंत्री के जरिए 10 जून, 2025 को याचिकाकर्ता को निलंबित करा दिया। 

error: Content is protected !!