छत्तीसगढ़ मंत्रिपरिषद के बड़े फैसले: पुलिस, शिक्षा, स्टार्टअप और शहरी विकास पर जोर
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1. पुलिस अधिकारियों को वरिष्ठ प्रवर श्रेणी वेतनमान: मंत्रिपरिषद ने 2005 से 2009 बैच के राज्य पुलिस सेवा अधिकारियों के लिए 30 सांख्येतर पद सृजित कर वरिष्ठ प्रवर श्रेणी वेतनमान प्रदान करने का फैसला किया। इससे पुलिस संवर्ग का प्रबंधन और सशक्तिकरण होगा।
2. वंचित समुदायों के लिए पैन आईआईटी के साथ संयुक्त उद्यम: छत्तीसगढ़ शासन और पैन आईआईटी एलुमनी रीच फॉर इंडिया फाउंडेशन के बीच गैर-लाभकारी संयुक्त उद्यम कंपनी के गठन को मंजूरी दी गई। यह कंपनी अनुसूचित जनजाति, वंचित समुदायों, महिलाओं और तृतीय लिंग के लोगों को व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास और ग्रामीण उद्यमिता के माध्यम से सशक्त बनाएगी। प्रशिक्षण के लिए शासकीय भवनों का उपयोग और विदेशी भाषा प्रशिक्षण के जरिए अंतरराष्ट्रीय रोजगार के अवसर प्रदान किए जाएंगे।
3. पुराने वाहनों से प्रदूषण और दुर्घटना पर रोक: छत्तीसगढ़ मोटरयान कराधान अधिनियम-1991 और मोटरयान नियम-1994 में संशोधन को मंजूरी दी गई। अब वाहन स्वामी अपने पुराने वाहन के फैंसी या च्वाइस नंबर को नए वाहनों में उपयोग कर सकेंगे, जिसके लिए निर्धारित शुल्क देना होगा। यह सुविधा नए वाहनों और अन्य राज्यों से लाए गए वाहनों पर लागू होगी।
4. छात्र स्टार्टअप और नवाचार नीति: राज्य के युवाओं को सशक्त बनाने के लिए छात्र स्टार्टअप और नवाचार नीति को मंजूरी दी गई। यह नीति 100 तकनीकी संस्थानों के 50,000 छात्रों तक पहुंच, 500 प्रोटोटाइप्स, 500 बौद्धिक संपदा अधिकार और 150 स्टार्टअप्स को इन्क्यूबेट करने का लक्ष्य रखती है। जनजातीय क्षेत्रों में नवाचार केंद्र स्थापित होंगे, और कृषि, हरित ऊर्जा, स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों पर ध्यान दिया जाएगा।
5. छत्तीसगढ़ राजधानी क्षेत्र विकास प्राधिकरण: रायपुर, दुर्ग-भिलाई और नया रायपुर अटल नगर के सुव्यवस्थित विकास के लिए राजधानी क्षेत्र विकास प्राधिकरण की स्थापना के लिए विधेयक को मंजूरी दी गई। यह प्राधिकरण 2031 तक 50 लाख की आबादी के लिए योजनाबद्ध शहरी विकास, निवेश और पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित करेगा।
6. कृषि, कर और भू-राजस्व में संशोधन: छत्तीसगढ़ कृषि उपज मंडी, माल और सेवा कर, बकाया कर निपटान, और भू-राजस्व संहिता में संशोधन विधेयकों को मंजूरी दी गई। ये संशोधन अवैध प्लाटिंग पर रोक, नामांतरण प्रक्रिया को सरल करने और छोटे-मध्यम व्यापारियों को राहत देंगे।
7. पत्रकारिता विश्वविद्यालय में संशोधन: कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय अधिनियम, 2004 में संशोधन को मंजूरी दी गई, जिससे शैक्षणिक ढांचा और मजबूत होगा।
8. निजी विश्वविद्यालयों के लिए संशोधन: छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय (स्थापना एवं संचालन) संशोधन विधेयक, 2025 को मंजूरी दी गई, जिससे निजी विश्वविद्यालयों का संचालन और गुणवत्ता बढ़ेगी।
ये निर्णय छत्तीसगढ़ को विकास, नवाचार और समावेशी प्रगति की दिशा में आगे ले जाने के लिए मील का पत्थर साबित होंगे।
