Friday, January 23, 2026
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Madhya Pradesh

अमरकंटक में रामघाट भजन गायक राज भदौरिया की डूबने से मौत हो गई, हजारों श्रद्धालुओं के सामने गई जान

अनूपपुर
नर्मदा नदी के उद्गम स्थल अमरकंटक में रामघाट पर गुरुवार को भजन गायक राज भदौरिया (22) की डूबने से मौत हो गई। घटना शाम करीब 5.30 की है। मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में नदी-तालाबों में डूबने की घटनाएं लगातार चिंता का विषय बनी हुई हैं। ताजा मामला अमरकंटक क्षेत्र का है, जहां ग्राम बालनपुर (भिंड) निवासी 22 वर्षीय भजन गायक “राज भदौरिया” अपने भाई और जीजा के साथ धार्मिक यात्रा पर पहुंचे थे। 10 जुलाई 2025, गुरुवार शाम करीब 5:30 बजे रामघाट में स्नान करते समय वे गहरे पानी में चले गए, संतुलन बिगड़ने से उनका पैर फव्वारे की रेलिंग में फंस गया और वे डूबने लगे। साथियों और आसपास मौजूद लोगों ने उन्हें बचाने की भरपूर कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हो सके। वॉटर बोट और स्थानीय निवासी कृष्णा पाल चौहान की मदद से रेस्क्यू कर राज को बाहर निकाला गया और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, अमरकंटक ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है।

इस हादसे के बाद मृतक के गांव और परिवार में शोक की लहर है, परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। प्रशासन ने लोगों से नदी-तालाबों में सतर्कता बरतने, बच्चों को अकेले न भेजने और गहरे पानी से बचने की अपील की है। ग्रामीणों ने चेतावनी बोर्ड और सुरक्षा इंतजाम बढ़ाने की मांग की है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।

अनूपपुर जिले में डूबने की प्रमुख घटनाएं:

1. 10 जुलाई 2025: अमरकंटक, रामघाट- भजन गायक राज भदौरिया (22) की डूबने से मौत।

2. 8 जुलाई 2025: ग्राम लोहारिन टोला- 4 वर्षीय जितेश सिंह नदी में डूबा, शव तीन दिन बाद मिला।

3. 25 जून 2024: पुष्पराजगढ़, जोहिला नदी- आकांक्षा गुप्ता (20) और अंशु गुप्ता (16) की डूबकर मौत।

4. अप्रैल 2024: मलगा गांव- तालाब में डूबने से अमित (14) और हरिसिंह (40) की मौत।

5. मई 2023: सारंगढ़, सीतामढ़ी तालाब- पिकनिक के दौरान दो लड़कियों और एक लड़के की डूबने से मौत।

प्रशासन और पुलिस ने बार-बार अपील की है कि बरसात के मौसम में नदी-तालाबों में स्नान करते समय विशेष सतर्कता बरतें, बच्चों को अकेले न छोड़ें और गहरे पानी में जाने से बचें। कई जगह अवैध उत्खनन के कारण खतरनाक गड्ढे बन गए हैं, जिनमें बारिश का पानी भर जाता है और हादसे का खतरा बढ़ जाता है। स्थानीय सामाजिक संगठनों ने चेतावनी बोर्ड लगाने और सुरक्षा के इंतजाम बढ़ाने की मांग की है।

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