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Tuesday, March 10, 2026
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सीजीपीएससी 2021 की भर्ती परीक्षा घोटाले में कार्रवाई तेज, गोयल के बेटा-बहू, टामन का भतीजा गिरफ्तार

रायपुर

 छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (सीजीपीएससी) भर्ती परीक्षा- 2021 घोटाले के मामले में सीबीआई ने रविवार को तीन और आरोपितों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया। इनमें सीजीपीएससी के पूर्व चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी का भतीजा साहिल सोनवानी (डीएसपी) भी शामिल है।

इसके अलावा बजरंग पावर के डायरेक्टर श्रवण गोयल का बेटा, डिप्टी कलेक्टर पद पर चयनित शशांक गोयल और बहू भूमिका कटियार को भी गिरफ्तार किया गया है। साल 2021 के परिणाम में शशांक और भूमिका क्रमश: तीसरे और चौथे टॉपर थे।

तीनों को एक दिन की सीबीआई रिमांड पर सौंप दिया गया। बता दें कि अब तक सात आरोपित सलाखों के पीछे जा चुके हैं। इससे पहले शनिवार को टामन के भतीजे नितेश सोनवानी (डिप्टी कलेक्टर) और पूर्व डिप्टी एग्जाम कंट्रोलर ललित गनवीर को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया था, जहां से सोमवार तक दोनों को रिमांड पर भेजा गया।

यह है मामला
सीजीपीएससी में वर्ष 2019 से 2022 तक की भर्ती में कुछ अभ्यर्थियों के चयन को लेकर विवाद है। ईओडब्ल्यू और अर्जुंदा पुलिस ने भ्रष्टाचार-अनियमितता के आरोप में मामला दर्ज किया है। आरोप है कि कुछ नेताओं और अधिकारियों के बच्चों को पैसे लेकर डिप्टी कलेक्टर और डीएसपी जैसे पदों पर नियुक्ति दी गई थी।

पीएससी ने 2020 में 175 पदों पर और 2021 में 171 पदों पर भर्ती की परीक्षा ली थी। आरोप है कि सीजीपीएससी के तत्कालीन चेयरमेन टामन सिंह सोनवानी ने अपने रिश्तेदारों, कारोबारियों समेत कांग्रेसी नेता और नौकरशाहों के बच्चों की कथित तौर पर भर्ती करवाकर विभिन्न पदों पर नौकरी लगवाई है।

सीबीआई के मुताबिक, सोनवानी के कार्यकाल में पीएससी की भर्ती परीक्षा में बड़े पैमाने पर धांधली हुई है। उन्होंने अपने कई रिश्तेदारों और कांग्रेस नेताओं और अधिकारियों के 18 रिश्तेदारों की नौकरी लगवाई है। मामले की जांच के दौरान पैसों के लेन-देन के पुख्ता सबूत भी मिले हैं।

इस तरह से हुआ पैसों का लेन-देन
आरोप है कि गोयल ने अपने बेटे शशांक गोयल और बहू भूमिका कटियार को नौकरी दिलाने के लिए सोनवानी के करीबी के एनजीओ को सीएसआर फंड से 45 लाख रुपये दिए थे। यह पैसे पीएसपी भर्ती के सलेक्शन के दौरान दो बार में 20 लाख और 25 लाख दिए गए।

जिस एनजीओ में पैसे डाले गए, उसकी चेयरमैन टामन की पत्नी है। इसी एनजीओ के जरिये सोनवानी तक पैसे पहुंचे थे। इस बात की पुष्टि होने के बाद कार्रवाई की गई है।