Saturday, January 24, 2026
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52वें सीजेआई: सुप्रीम कोर्ट के अगले सीजेआई के पास है कितनी संपत्ति, जस्टिस बीआर गवई ने खुद बताया

नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट के 20 से ज्यादा न्यायाधीश संपत्ति की जानकारी सार्वजनिक कर चुके हैं। इनमें शीर्ष न्यायालय के अगले CJI यानी मुख्य न्यायाधीश भूषण रामकृष्ण गवई का नाम भी शामिल है। उनके पास महाराष्ट्र और नई दिल्ली में कई फ्लैट हैं। इसके अलावा लाखों रुपये बैंक में हैं। वह भारत के 52वें सीजेआई बनने जा रहे हैं। उनके अलावा मौजूदा सीजेआई संजीव खन्ना भी संपत्ति का ब्योरा दे चुके हैं।

अगले सीजेआई के पास है कितनी संपत्ति
जस्टिस गवई के पास महाराष्ट्र के अमरावती में एक घर, दो कृषि भूमि हैं। वहीं, मुंबई के बांद्रा में एक अपार्टमेंट, नागपुर के कटोल में कृषि भूमि और नई दिल्ली की डिफेंस कॉलोनी में एक अपार्टमेंट है। निवेश के मामले में जस्टिस गवई के पास पीपीएफ के तहत 6 लाख 59 हजार 692 रुपये, जीपीएफ के तह 35 लाख 86 हजार 736 रुपये, अन्य 31 हजार 315 रुपये हैं। उनके पास 5 लाख 25 हजार 859 रुपये सोने के आभूषण हैं। साथ 61 हजार 320 रुपये कैश, बैंक बैलेंस 19 लाख 63 हजार 584 रुपये और अन्य एडवांस 54 लाख 86 हजार 841 रुपये हैं। दायित्व के तहत मुंबई फ्लैट का सिक्योरिटी डिपॉजिट 7 लाख रुपये, दिल्ली के फ्लैट का एडवांस किराया 17 लाख 32 हजार 500 रुपये है।

52वें सीजेआई
जस्टिस गवई को मंगलवार को भारत का अगला CJI नियुक्त किया गया। न्यायमूर्ति गवई 14 मई को सीजेआई का पदभार संभालेंगे। मौजूदा सीजेआई न्यायमूर्ति संजीव खन्ना का कार्यकाल 13 मई को समाप्त हो रहा है। 16 अप्रैल को प्रधान न्यायाधीश खन्ना ने न्यायमूर्ति गवई के नाम की अनुशंसा केंद्र सरकार को की थी। न्यायमूर्ति गवई का कार्यकाल छह महीने का होगा। वह 24 मई 2019 को उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश बनाए गए थे। 23 नवंबर को 65 वर्ष की आयु होने पर न्यायमूर्ति गवई का कार्यकाल खत्म हो जाएगा।

अमरावती में 24 नवंबर 1960 को जन्मे न्यायमूर्ति गवई को 14 नवंबर 2003 को बंबई उच्च न्यायालय के अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया था। वह 12 नवंबर 2005 को उच्च न्यायालय के स्थायी न्यायाधीश बने। न्यायमूर्ति गवई उच्चतम न्यायालय में कई संविधान पीठों का हिस्सा रहे हैं, जिन्होंने महत्वपूर्ण फैसले सुनाए हैं। वह पांच न्यायाधीशों वाली संविधान पीठ का हिस्सा थे, जिसने दिसंबर 2023 में सर्वसम्मति से पूर्ववर्ती जम्मू-कश्मीर राज्य को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त करने के केंद्र के फैसले को बरकरार रखा था। वह 16 मार्च 1985 को बार में शामिल हुए थे और नागपुर नगर निगम, अमरावती नगर निगम और अमरावती विश्वविद्यालय के स्थायी वकील थे।

न्यायमूर्ति गवई को अगस्त 1992 से जुलाई 1993 तक बंबई उच्च न्यायालय की नागपुर पीठ में सहायक सरकारी वकील और अतिरिक्त सरकारी अभियोजक नियुक्त किया गया था। उन्हें 17 जनवरी 2000 को नागपुर पीठ के लिए सरकारी वकील नियुक्त किया गया।

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