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Wednesday, March 11, 2026
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टीएस सिंहदेव के इस्तीफे से विधायक आहत, कहा- आलाकमान करे सख्त कार्रवाई, पीएल पुनिया ने लिया संज्ञान…

इम्पैक्ट डेस्क.

छत्तीसगढ़ कांग्रेस में इन दिनों हलचल मची हुई है। कैबिनेट मंत्री टीएस सिंहदेव ने पंचायती एवं ग्रामीण विकास विभाग से इस्तीफा दे दिया है। ऐसे में रविवार को राज्य के विधायक दल की बैठक हुई। इसमें सिंहदेव के खिलाफ राज्य विधानसभा के मानसून सत्र से पहले सख्त और सम्मानजनक कार्रवाई की मांग उठी। कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक और राज्य सरकार के प्रवक्ता रवींद्र चौबे ने सोमवार को कहा कि टीएस के इस्तीफे पर रविवार रात कैबिनेट की बैठक में चर्चा हुई और मंत्री के इस्तीफे से विधायक आहत हैं।

सिंह देव ने शनिवार को पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग से इस्तीफा दे दिया, जो भूपेश बघेल कैबिनेट में उन्हें आवंटित किए गए पांच विभागों में से एक था। हालांकि वे स्वास्थ्य और परिवार कल्याण, चिकित्सा शिक्षा, बीस सूत्रीय कार्यान्वयन और वाणिज्यिक कर (जीएसटी) विभागों के मंत्री की जिम्मेदारी का निर्वहन करते रहेंगे। चौबे ने कहा, ‘बैठक में सिंहदेव के इस्तीफे पर चर्चा हुई। उनके फैसले से सभी विधायक आहत हुए और मांग की कि इसपर आलाकमान द्वारा कड़ी लेकिन सम्मानजनक कार्रवाई की जाए।’

पीएल पुनिया ने लिया मामले का संज्ञान

प्रवक्ता ने आगे कहा कि बैठक में लगभग 60 विधायक थे और उनमें से अधिकांश ने कहा कि 20 जुलाई से शुरू होने वाले विधानसभा के मानसून सत्र से पहले इस तरह के कदम (सिंह देव का इस्तीफा) पार्टी के लिए अच्छे नहीं हैं। उन्होंने ने कहा, ‘छत्तीसगढ़ कांग्रेस के प्रभारी पीएल पुनिया का कहना है कि उन्होंने इस मामले का संज्ञान लिया है और उन्हें विधायकों की भावनाओं की जानकारी है। विधानसभा का सत्र शुरू होने से पहले इसपर फैसला लिया जाएगा। कार्रवाई सम्मानजनक होगी।’

आलाकमान का फैसला मानने को बाध्यकारी

चौबे के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए सिंहदेव ने सोमवार को कहा, ‘हम आलाकमान के अधीन हैं और उनका फैसला मेरे लिए बाध्यकारी है।’ सिंह देव और बघेल के बीच अंदरुनी कलह जारी है। पंचायती एवं ग्रामीण विकास विभाग से इस्तीफा देते हुए सीएम को लिखे पत्र में उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बेघर लोगों के लिए एक भी आवास का निर्माण नहीं हुआ है क्योंकि ‘बार-बार अनुरोध’ के बावजूद धन आवंटित नहीं किया गया। चार पन्नों के त्यागपत्र में, उन्होंने विभिन्न कारणों का हवाला देते हुए कहा कि वे वर्तमान स्थिति में जन घोषणा पत्र (चुनाव घोषणापत्र) के विजन को पूरा करने में असमर्थ हैं।