शिक्षाविभाग से नाराजगी कम नहीं हुई है विधायकों की…

आखिरकार शिक्षामंत्री को बचाने ओएसडी की बलि…

  • इम्पेक्ट न्यूज. रायपुर.

शिक्षा विभाग में तबादलों के बाद जो बवाल उठा उसका समापन अभी हो गया हो ऐसा नहीं दिख रहा है। बस्तर के कई विधायक शिक्षामंत्री के व्यवहार को लेकर अब भी खासे नाराज हैं। वे साफ कह रहे हैं कि शिक्षामंत्री ने अपने विभाग को लेकर बड़ा खिलवाड़ किया है। यह स्थिति पहले से बदतर करने वाली है। इन विधायकों का इशारा साफ है कि पूर्व मंत्री केदार कश्यप के जमाने में शिक्षा विभाग में जिस तरह की गड़बड़ियां उजागर सामने आईं हैं उससे भी बुरा दौर आने वाले वक्त में सामने आ सकता है।

उल्लेखनीय है कि तबादला मामले के बाद शिक्षा मंत्री डा. प्रेमसाय सिंह के ओएसडी राजेश सिंह को प्रभार से मुक्त कर दिया गया है। शिक्षा विभाग में तबादला लिस्ट जारी होने के बाद जो बवाल खड़ा हुआ उसकी आंच सीएम दफ्तर तक पहुंची। कैबिनेट की बैठक में शिक्षा मंत्री पर सवाल भी उठाए गए। वहां मसले को टीएस बाबा ने संभाल लिया। राज्य में नंबर दो की राजनैतिक हैसियत रखने वाले मंत्री टीएस सिंहदेव ने शिक्षा मंत्री के खुलकर बचाव किया था।

इसी बैठक में शिक्षामंत्री के ओएसडी राजेश सिंह पर जब गड़बड़ियों को ठिकरा फोड़ा गया तो शिक्षामंत्री डा. सिंह ने उनका बचाव भी किया। बुधवार को राज्य शासन ने राजेश सिंह से शिक्षामंत्री के ओएसडी का अतिरिक्त प्रभार छिन लिया।

बस्तर में विधायकों का साफ आरोप है कि शिक्षाविभाग में जमकर दलाली हो रही है। सरकार की छवि पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। कमीशनखोरी की इंतिहा हो गई है। डीईओ पूरी तरह से मनमानी फैसले ले रहे हैं।

जगदलपुर के डीईओ को लेकर भी जमकर खरी—खोटी सुनाई जा रही है। जगदलपुर में डीईओ की कार्रवाई को लेकर भारी असंतोष भी है। माना जा रहा है कि डीईओ के चलते कांग्रेस के हाथ से नगर निगम की बागडोर छिनने की नौबत है।

वहीं कई मामलों में शिक्षाविभाग में की गई पदस्थापनाओं को लेकर बड़ा विवाद है। पूर्ववर्ती भाजपा सरकार के दौरान लाभान्वित अफसरों को कई जगहों पर बिठाया गया है। जिसका असर कांग्रेस के कार्यकर्ताओं पर पड़ रहा है।

हांलाकि ओएसडी राजेश सिंह पर शिक्षाविभाग की सारी अनियमिततओं का ठिकरा फोड़कर विभाग के शुद्धिकरण का प्रयास दिखाने की कोशिश की गई है। दंतेवाड़ा में चुनाव के दौरान पहुंचे कई वरिष्ठ विधायकों ने अनौपचारिक चर्चा में साफ कहा कि वे उपचुनाव के बाद मुख्यमंत्री से मिलकर विभाग में आमूलचूल परिवर्तन की मांग के लिए दबाव बनाएंगे।

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