आलनार में लीज पर दी गई है 31.55 हेक्टेयर की खदान… ग्राम सभा में स्वीकृति कब मिली पता नहीं…?

विशेष रिपोर्ट / सुरेश महापात्र

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इसी माइनिंग लीज को लेकर उपचुनाव के प्रचार के दौरान पूर्ववर्ती भाजपा सरकार पर किया था हमला… सीएम ने कहा था ‘इस कंपनी में भाजपा नेता छगनमूंदड़ा भी हैं डायरेक्टर’

बैलाडिला की पहाड़ियों में अब रहस्यों का डेरा है। यहां कितनी कंपनियों ने खदान की लीज ले रखी है और कितने कतार पर हैं, यह स्पष्ट तौर पर कहना कठिन है। हांलाकि हर लीज को गलत नहीं ठहराया जा सकता पर लीज की प्रक्रिया के दोष जरूर सवाल खड़े करते हैं। वैसे भी पांचवीं अनूसूची प्रभावित बस्तर में लीज हासिल करना वास्तव में टेढ़ी खीर है।

एक ऐसा ही मामला सामने दिख रहा है कंपनी का नाम है आरती स्पंज एंड पावर लिमि. इस कंपनी को धुर नक्सल प्रभावित इलाके आलनार में 31.55 हेक्टेयर आयरन ओर खदान के माइनिंग की लीज प्राप्त हो चुकी है। लीज के डाक्यूमेंट पब्लिक डोमेन पर स्थित हैं बावजूद इसके दक्षिण बस्तर के वाशिंदों को इस कंपनी का नाम तक पता नहीं है। 

पर्यावरण मंडल के जो दस्तावेज पब्लिक डोमेन में हैं उसके मुताबिक पर्यावरण क्लीयरेंस के लिए बकायदा 30 सितंबर 2016 को वन विभाग दंतेवाड़ा के काष्ठागार में जन सुनवाई संपन्न हुई है। पर्यावरण मंडल की जन सुनवाई के लिए विज्ञापन का प्रकाशन सरकारी एजेंसी संवाद द्वारा जारी किया गया है। यह विज्ञापन रायपुर से प्रकाशित अमृत संदेश, दैनिक देशबंधु और राष्ट्रीय अंग्रेजी दैनिक हिंदुस्तान टाइम्स में  27 अगस्त 2016 को प्रकाशित है। 

तकनीकी तौर पर यह स्वीकार्य है कि विधिवत विज्ञापन का प्रकाशन तो किया ही गया है। पर इस विज्ञापन को पर्यावरण संरक्षक मंडल की प्राथमिकता में भले ही स्थानीय समाचार पत्र की श्रेणी बताई गई हो पर इसे स्थानीय स्तर पर प्रसारित समाचार पत्रों में विज्ञापन का प्रकाशन नहीं करवाया जाना संदेहों को जन्म देता है। इसके लिए कंपनी को जिम्मेदार नहीं माना जा सकता।

सवाल यह है कि जब पर्यावरण को लेकर जनसुनवाई की गई तो उसमें अलनार गांव का प्रतिनिधि शामिल नहीं था। दंतेवाड़ा, किरंदुल, बचेली और गीदम के साथ आस—पास के लोगों की उपस्थिति का उल्लेख किया गया है। पब्लिक डोमेन में ग्राम सभा के संबंध में किसी भी प्रकार का दस्तावेज उपलब्ध नहीं है।

बात यह भी नहीं है कि यह आयोजन कब और कैसे किया गया? बल्कि यह है कि अतिसंवेदनशील नक्सल प्रभावित इलाके में प्रास्पेंक्टिंग लीज मिलने के बाद उसकी प्रक्रिया को पूरा करने में क्या जान बूझकर कुछ कमियों को स्वीकार कर लिया गया? 

इस आरती स्पंज एंड पावर लिमि. में डायरेक्टर के तौर पर जो नाम शामिल हैं उससे लगता है कि सत्ता के प्रभाव में इस प्रक्रिया को पूरा किया गया है। ग्राम सभा के अलावा यह कहना फिलहाल कठिन है कि प्रक्रिया में और किस तरह के दोष हैं। 

मौके पर जो हालात हैं उसके संबंध में जानने से लगता है कि वहां भौतिक तौर पर प्रक्रियाओं का पालन संभव नहीं है। माइनिंग लीज प्राप्त होने के बाद कंपनी द्वारा पहुंची एक टीम को नक्सलियों ने बंधक बना लिया था उसे मार—पीट करने के बाद छोड़ने की सूचना भी ग्रामीण दे रहे हैं।

फिर भी चूंकि बस्तर में लौह अयस्क के पहाड़ियों में उद्योग घरानों की नजर होने की बात सार्वजनिक है। इस तरह से किसी एक उद्योग के लिए खदान की लीज की प्रक्रिया पूरी हो गई और क्षेत्र के लोगों को जानकारी तक नहीं होना सवाल तो जरूर खड़ा करता है। 

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