दुग्ध उपादन मे भी नई पहचान बनेगी कोण्डागांव जिले की

इम्पेक्ट न्यूज. रायपुर.

नीति आयोग के संयुक्त सचिव दिलीप कुमार ने चुरेगांव दुग्ध संग्रहण सह प्रशीतन केन्द्र का किया दौरा: जिले का पहला दुग्ध संग्रहण केन्द्र बनेगा ग्राम चुरेगांव में

प्रशीतन केन्द्र से संग्रहित दूध भेजा जायेगा दुग्ध महासंघ रायपुर में

राज्य में मक्का प्रसंस्करण केन्द्र, चुड़ी डिजाईनिंग, एलईडी बल्ब निर्माण, तार फेंसिग निर्माण जैसी नवाचार रोजगार कार्यक्रमो से युवाओं और महिलाओं को जोड़ने के बाद अब दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में भी जिला कोण्डागांव अपनी नई पहचान बनाने के लिए अग्रसर है। यूं तो पूरे बस्तर संभाग मे गौवंशीय दुधारू पशुओं की बहुतायत है।

जिनसे प्राप्त दुग्ध का स्थानीय घरेलू खपत तो होता ही रहा है, पर इसका बड़े पैमाने पर व्यावसायिक उपयोग नहीं के बराबर है। इसे देखते हुए प्रथम बार जिला प्रशासन द्वारा जिले मे होने वाले दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र मे रोजगार की संभावनाएं तलाशी जा रही है। इसके तहत विकासखण्ड फरसगांव के ग्राम चुरेगांव कैंप में दुग्ध संग्रहण सह प्रशीतन केन्द्र की स्थापना की जायेगी।

आज मुख्य कार्यपालन अधिकारी नीति आयोग नई दिल्ली के निर्देशानुसार केन्द्रीय प्रभारी अधिकारी दिलीप कुमार (आईएएस) विशेष कार्य अधिकारी अध्यक्ष लोकपाल भारत सरकार द्वारा ग्राम चुरेगांव स्थित दुग्ध संग्रहण सह प्रशीतन केन्द्र का दौरा किया

इस दौरान उन्होंने केन्द्र का संचालन करने वाले समिति को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि वे अधिक से अधिक मात्रा मे दुग्ध संग्रहण एंव विपणन करके इसे एक सफल व्यवसाय का रूप देंवे। इस अवसर पर कलेक्टर नीलकण्ठ टीकाम ने बताया कि जिले में हो रहा दुग्ध उत्पादन खाद्य सुरक्षा (पौष्टिक आहार सुरक्षा) एंव स्वरोजगार सुनिश्चित करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम हो सकता है।

इससे किसानों की आय दुगूनी करने के साथ साथ दुग्ध उत्पादन एंव विपणन के कार्य को नई दिशा दी जा सकती है। इसके तहत् जिले में छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी दुग्ध महासंघ मर्यादित रायपुर के द्वारा फरसगांव विकासखण्ड के पांच ग्रामों चुरेगांव कैंप पूर्वी बोरगांव, सिंगारपुरी, मध्यम बोरगांव, का सर्वेक्षण किया गया था।

सर्वेक्षण में यह पाया गया कि इस क्षेत्र में प्रतिदिन लगभग 3200 लीटर दुग्ध उत्पादन होता हैं जिसमें से घरेलू उपयोग के उपरान्त 3000 लीटर दुग्ध प्रतिदिन अतिशेष रह जाता है। चूंकि इससे दुग्ध संग्रहण एंव विपणन की अच्छी व्यवस्था के अभाव मे स्थानीय पशु पालकों को उनके दुग्ध का उचित मूल्य नही मिल पा रहा था। 

इसे देखते हुए जिला प्रशासन द्वारा नई कार्ययोजना बनाई गई और प्रस्ताव के तहत 3000 लीटर क्षमता बल्क मिल्क कूलर ईकाई केन स्क्रबर, 5000 लीटर क्षमता का स्टोरज टैंक, 5000 लीटर क्षमता कूलर ईकाई टैंकर डबल चैम्बर, दुग्ध परीक्षण किट, अभिलेख मिल्क केन, केमिकल, इलेक्ट्रानिक वजन मशीन, इलेक्ट्रनिक मिल्कों टेस्टर, बोरवेल्स पंप पाइप, विधुत कनेक्शन एंव अन्य अधोसंरचना विकास का निर्माण किया गया।

वर्तमान मे सभी कार्य पूर्ण हो चूके है और शीघ्र ही दुग्ध संग्रहण का कार्य पूर्ण कर लिया जायेगा। साथ ही केन्द्र द्वारा उत्पादन किया दूध को दुग्ध महासंघ रायपुर को भेजा जाएगा। इस प्रवास के दौरान नीति आयोग के संयुक्त सचिव दिलीप कुमार द्वारा एंव जिला कलेक्टर द्वारा प्रशीतन केन्द्र के प्रांगण मे वृक्षारोपण भी किया गया।

संयुक्त सचिव श्री दिलीप कुमार द्वारा ग्राम चुरेगांव में ही मत्स्य बीज उत्पादन कर रहे कृषक ‘तारक बाला’ के मत्स्य उत्पादक फार्म का निरीक्षण किया गया। उक्त कृषक ने मौके पर जानकारी देते हुए बताया कि उसने लगभग अपने 5 एकड़ के फार्म में मत्स्य उत्पादन का कार्य प्रारंभ किया है।

जिसमें मृगल, कतला, कॉमनकार्प, तेलापिया, रोहू, मछलियों के साथ साथ उनके बीज भी स्थानीय व्यापारियों को उपलब्ध कराते है। इस दौरान संयुक्त सचिव ने उस पूरे फार्म का निरीक्षण करते हुए उसकी सराहना किया। साथ ही जिला कलेक्टर ने उसे अन्य कृषकों को भी मत्स्य उत्पादन संबंधी मार्गदर्शन देने की सलाह दी।

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