सात दिनों का आंदोलन तय करेगा अडानी की कंपनी “एईएल” का भविष्य… आक्रोशित आदिवासियों की भीड़ तो छंट गई पर पीछे बहुत से सवाल छोड़ गई…

  • धीरज माकन.किरंदुल.

डिपाजिट-13 की पहाड़ी स्थानीय लोगों के लिए लोहे की पहाड़ी हो सकती है लेकिन अडानी के नजर में यह उसके लिए सोने की खान साबित हो सकती थी, एक छोटी सी पहाड़ी के जरिये पूरे लौह अयस्क की पहाड़ियों पर कब्जा जमाने का मंसूबा अब अडानी के लिए धुंधला साबित हो रहा है।

पिछले छह माह से अडानी समूह के अधिकारी जिस फुर्ती से 13 नंबर की पहाड़ी पर चढ़ने की योजना तैयार कर रहे थे उसी तेजी से उनके मंसूबे धरातल में जा गिरे।

छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा उस पहाड़ी में किसी भी प्रकार का कार्य करने पर रोक लगा दिए जाने से यह समझा जा सकता है कि अब आने वाले एक या दो वर्षों में उस छेत्र में झांकना भी गुनाह होगा।

बहरहाल अब पूरा मामला पेचीदा हो गया है और सारी औपचारिकताएं जांच के दायरे में समा गई हैं।अब आने वाला समय तय करेगा कि बैलाडिला का लौह अयस्क अडानी का सिरमौर बनेगा की नही…

इससे पहले भी हुए हैं कई आंदोलन

इससे पूर्व भी बैलाडीला में लौह अयस्क की पहाड़ियों को बचाने के लिए कई बड़े बड़े आंदोलन को अमली जामा पहनाया गया है 1978 में मजदूरों की छंटनी के विरोध में मशहूर मजदूर नेता कामरेड इन्द्रजीत सिंह संधू के नेतृत्व में बड़ी लड़ाई लड़ी गयी और गोली कांड में कई मजदूरों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी।

सन 2000 के बाद एनएमडीसी में विनिवेश के खिलाफ मजदूर संगठनों ने आवाज़ बुलंद की और कई लंबी-लंबी लड़ाई लड़ी। हालांकि उसमें ज्यादा सफलता हासिल नही हुई।

निक्षेप 11 बी से निजी कंपनी निप्पन डेनरो को भी उल्टे पाँव भागना पड़ा था। जिसके लिए मजदूर संगठनों ने लंबी लड़ाई लड़ी थी। तीन वर्षों पूर्व परियोजना के एक तानाशाह महाप्रबंधक बी साहू के खिलाफ भी मजदूर संगठनों ने परियोजना में 10 दिनों तक उत्पादन ढप्प कर लंबा आंदोलन किया था।

उसके बाद अब सात दिनों की आदिवासियों और मजदूर संगठनों की लंबी लड़ाई 13 नंबर पहाड़ी का भविष्य तय करेगी।

बसों और ट्रकों में भेजे गए आन्दोलनकारी

सात दिनों तक आदिवासियों की चली अपने इष्ट देवी को लेकर लड़ाई का अंतिम पड़ाव इस आश्वासन के बाद आया कि फर्जी ग्राम सभा की जांच 15 दिनों में पूरी कर ली जाएगी, 50 किलोमीटर से भी ज्यादा दूरी से आये सभी आंदोलनकारियों को एन एम डी सी अपना मानवीय चेहरा दिखाते उनके गांवों तक पंहुचने में मदद की।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *