दंतेवाड़ा के बहुचर्चित जमीन अदला—बदली के मामले में जांच पर रोक नहीं कहा सुप्रीम कोर्ट ने, जांच के दायरे में दंतेवाड़ा के 2 पूर्व DM

इम्पेक्ट न्यूज @ रायपुर

इसमें पूर्व आईएएस एवं वर्तमान भाजपा नेता ओपी चौधरी व वर्तमान में चिप्स के प्रबंध निदेशक केसी देवसेनापति की भूमिका पर हाईकोर्ट ने जताया था संदेह

यही है विवादित स्मार्ट काम्प्लैक्स जिसकी भूमि पर मामला सुप्रीम कोर्ट में है।

दंतेवाड़ा में भूमि अदला—बदली का मामला एक बार फिर चर्चा में है। यहां जिला प्रशासन ने कलेक्टोरेट के करीब करीब तीन एकड़ 67 डिसमिल भूमि को अधिग्रहण किया था। इसके एवज में भूमि स्वामियों को बीच बाजार में करीब 23 डिसमिल जमीन के साथ अन्य भूमि को राजस्व भूमि की कीमत के तहत स्वीकृत कर अदला—बदली की प्रक्रिया पूरी की थी।

इस मामले में विवाद तब उठ खड़ा हुआ जब पूर्ववर्ती कलेक्टर ओम प्रकाश चौधरी द्वारा 50 डिसमिल जमीन के आबंटन को निरस्त करने के बाद 23 डिसमिल जमीन भूमि स्वामियों को हस्तांतरित कर दी गई। अदला—बदली के तहत जिस भूमि को सौंपा गया उसमें दंतेवाड़ा के व्यापारियों के लिए काम्प्लेक्स का निर्माण किया जाना प्रस्तावित था।

बड़ी बात यह है कि ओम प्रकाश चौधरी के कलेक्टर रहते इसी 23 डिसमिल भूमि पर व्यापारिक काम्प्लेक्स के निर्माण के लिए प्रक्रिया शुरू की गई थी। जिसमें कथित तौर पर दंतेश्वरी सरोवर से लगे टेंपल की भूमि पर व्यापार संचालित कर रहे व्यापारियों को दुकान आबंटित किया जाना था। इस जमीन पर व्यापारियों के लिए काम्प्लेक्स बनाने के बजाए भूमि अदला—बदली में जमीन को अन्य हितग्राहियों को हस्तांतरित कर दिया गया और सरोवर के किनारे व्यापार कर रहे लोगों को प्रशासन ने छलपूर्वक बेजा कब्जा हटाने के नाम पर विस्थापित कर दिया।

इसके बाद भूमि अदला—बदली के मामले ने तूल पकड़ लिया। इस मामले को लेकर स्थानीय लोगों ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई। जिस पर बिलासपुर हाईकोर्ट ने 23 डिसमिल भूमि के हस्तांतरण को अवैध मानते हुए पूर्व स्थिति बहाल करने के आदेश दिए। साथ ही इसी अदला—बदली के प्रकरण पर हाईकोर्ट ने भ्रष्टाचार की आशंका जताते संबंधित अफसरों के विरुद्ध जांच के आदेश भी दिए। जिसके लिए छत्तीसगढ़ शासन को निर्देेश जारी किया गया था।

इधर हाई कोर्ट का फैसला आते तक 23 डिसमिल भूमि पर स्मार्ट काम्प्लेक्स का निर्माण किया जा चुका था। जिसका जिक्र हाईकोर्ट ने अपने फैसले में भी किया है। इस काम्प्लेक्स में कई व्यापारियों ने अपनी पूंजी लगाकर दुकाने खरीदी हैं। जिसमें वे व्यापार भी प्रारंभ कर चुके थे। 

ऐसे प्रभावित लोगों के लिए हाईकोर्ट ने विक्रेताओं से वसूली का आदेश दिया था। पर निर्मित हो चुके इस काम्प्लेक्स के व्यापारियों ने इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगा दी। जिससे हाईकोर्ट के आदेश पर फिलहाल स्टे लगा हुआ है।

स्टे के इसी आदेश के तहत छत्तीसगढ़ शासन ने इस मामले की जांच बंद कर दी थी। बीते विधानसभा चुनाव के दौरान आम आदमी पार्टी ने इस मामले को लेकर लोक आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट में पुन: इसे लेकर अपील दर्ज की गई। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने पुन: स्पष्ट कर दिया कि हाईकोर्ट के जिस फैसले पर स्टे दिया गया है उसमें संबंधित अफसरों के विरुद्ध जांच पर रोक शामिल नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट के इस नए आदेश के बाद निश्चित तौर पर वर्तमान में कार्यरत आईएएस केसी देव सेनापति और तत्कालीन एसडीएम सौरभ कुमार की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। वर्तमान में सौरभ कुमार संचालक लोक शिक्षण विभाग के पद पर कार्यरत हैं और केसी देव सेनापति चिप्स के प्रबंध संचालक हैं। वहीं ओम प्रकाश चौधरी वर्तमान में भाजपा की राजनीति में शामिल हो गए हैं।

यह देखना दिलचस्प होगा कि अब जब प्रदेश में कांग्रेस की सरकार है और यहां पूर्ववर्ती भाजपा सरकार के कार्यकाल में किए गए कई मामलों को लेकर भूपेश सरकार घेराबंदी का कोई अवसर नहीं छोड़ रही है तो ऐसे में दंतेवाड़ा के इस बहुचर्चित भूमि अदला—बदली और कथित भ्रष्टाचार के मामले में सरकार का क्या रूख होता है। 

हमारे साथ न्याय हो : मो. साहुल हमीद

”भूमि अदला—बदली के इस प्रकरण में प्रभावित मोहम्मद साहुल हमीद ने कहा ​कि इस मामले में हम स्वयं न्याय की प्रतिक्षा में खड़े हैं। प्रशासन ने हमसे 3.67 एकड़ भूमि का अधिग्रहण कर लिया। इसके बाद केवल 23 ​डिसमिल जमीन ही हमे मिल पाई थी। जिस पर पूंजी लगाकर, ​बैंक से कर्ज लेकर काम्प्लेक्स का निर्माण किया वह भी अधूरा है। हम बैंक की किस्त अदा कर रहे हैं। ब्याज चुका रहे हैं। हमारे साथ न्याय होना चाहिए। श्री हमीद ने कहा कि इस मामले में जो भी अफसर दोषीं है उन्हें जो भी सजा देना हो दी जाए पर हमें न्याय जरूर मिले। ”

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